मुलायम में मोदी के कान में क्या कहा? लखनऊ के गलियारों में जबरदस्त चर्चा

लखनऊ: यूपी की नयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह  के दौरान मुलायम सिंह मोदी से दोबारा मिलने गए और उनके कान में कुछ कहा. मोदी ने भी मुलायम की बात को झट से मान लिया और हां में इशारा किया . दोनों नेताओं के इस छोटे से अनसुने वार्तालाप को देखकर सत्ता के गलियारों में कयासों का बाज़ार गर्म हो गया. जानकारों का मानना है कि इस संवाद में कुछ ऐसा हुआ जिसका मतलब अखिलेश, मुलायम, और बीजेपी से जुड़ा हुआ है. जानकारों का कहना है कि मुलायम सिंह का कुछ बुदबुदाना और प्रधानमंत्री द्वारा अखिलेश व मुलायम के हाथों को गर्मजोशी से पकड़ कुछ समझाना, यह वह नजारा रहा, जो अमूमन धुर विरोधी दल के मंच पर नहीं दिखता. मुलायम ने मोदी के कान में क्या कहा, इसे कोई समझ तो नहीं पाया लेकिन प्रधानमंत्री ने जब उन्हें सिर हिलाते हुए आश्वस्त किया तो लगा ही नहीं कि दोनों में कोई सियासी विरोध है.

लगभग 47 मिनट चले योगी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री ने भले ही भाषण नहीं दिया लेकिन मंच पर एक से दूसरे सिरे तक चहलकदमी में बिन बोले बहुत कुछ संदेश दे दिया. मोदी मंच पर मौजूद सभी नेताओं से न केवल खुले अंदाज से मिले वरन पीछे कतार में बैठे बुजुर्ग नेता नारायणदत्त तिवारी के पास पहुंचे और उनका हालचाल जाना. पूरे समारोह में शपथ लेने वाले मंत्रियों को मोदी ने अपने पैर छूने से रोका लेकिन अपनी कुर्सी से उठ कर प्रत्येक मंत्री का अभिवादन स्वीकार करने में जरा आलस्य नहीं किया. मुलायम ने प्रधानमंत्री के कान में कुछ कहा तो उसी वक्त अखिलेश भी आ गए. मोदी ने पिता पुत्र के हाथों को पकड़ते हुए अखिलेश से कुछ कहा, जवाब में अखिलेश भी सहमति से सिर हिलाते दिखे. इतना नहीं प्रधानमंत्री ने अखिलेश की पीठ भी थपथपाई.

समारोह के समापन पर प्रधानमंत्री मंच से रुख्सत होने लगे तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मुलायम का हाथ पकड़ कर उन्हें मोदी के पास लाये. नेताजी पर नजर पड़ते ही मोदी ने गर्मजोशी से उनका हाथ थाम लिया. पीछे से अखिलेश भी आ पहुंचे. उन्होंने भी प्रधानमंत्री से शालीनता के साथ हाथ मिलाया. सियासत के परस्पर विरोधी ध्रुवों के मिलन से भावनाओं का जो ज्वार उमड़ा, उससे अभिभूत भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी गगनभेदी नारा लगाया. मानो ढाई महीने चले इस उत्सव के समापन पर लोकतंत्र के मर्म से उनका साक्षात्कार हुआ हो. मंच पर मुलायम व मोदी एक बार नहीं बल्कि तीन बार मिले. प्रधानमंत्री मंचासीन प्रमुख नेताओं की कुशलक्षेम लेने के बाद मंच से उतरने से पहले नवनियुक्त मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को हिदायत देना नहीं भूले.

नजर नहीं आए बसपा व कांग्रेस नेता : नयी सरकार के मंत्रियों के शपथग्रहण समारोह में कांग्रेस, बसपा जैसे दलों के किसी वरिष्ठ नेता उपस्थित नहीं होना भी लोगों को अखरा. लोगों का कहना था कि यदि इन दोनों दलों के नेता यदि आज यहां उपस्थिति होते तो गौरवशाली राजनीतिक परंपरा का एक उदाहरण युवाओं को देखने को मिलता.

 

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