योगी के ‘महान’ फैसलों की हकीकत, पहाड़ में छिपाकर परोस रहे हैं चुहिया

योगी के ‘महान’ फैसलों की हकीकत, पहाड़ में छिपाकर परोस रहे हैं चुहिया




नई दिल्ली: बीजेपी का पूरा फोकस योगी पर है. मकसद है कि मोदी को कुछ राहत दी जाए. सारे चुनाव निपटने के बाद अब मामला केन्द्र के प्रदर्शन की तरफ जाने का खतरा था इसलिए सोशल मीडिया सेल और  पार्टी से फंडेड परंपरागत मीडिया को कहा गया है कि वो ज्यादा से ज्यादा मोदी पर फोकस करें. हालात ये हैं कि मोदी के हर कदम को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जा रहा है. यहां हम आपको बताते हैं कुछ बानगियां-

1) ढाई महीने में गड्ढामुक्त यूपी

सीएम योगी ने राज्य की सड़कों को ढाई महीने में गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए हैं. गोरखपुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कें 15 जून तक गड्ढा मुक्त होनी चाहिए.

(संपादक-हाल ही में चुनाव के मद्देनज़र अखिलेश सरकार ये काम पूरा कर चुकी है. चुनाव के कारण सड़कों पर खास ध्यान दिया गया अब उसी काम का क्रेडिट लूटने की तैयारी चल रही है)

2) मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को 1 लाख की मदद

दुर्लभ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए योगी सरकार ने आर्थिक अनुदान 50 हजार रुपये से बढ़ाकर लाख रुपये कर दिया है. तीर्थ यात्रियों की परेशानियों व समस्याओं पर गौर करते हुए दिल्ली के आस-पास राज्य में किसी उपयुक्त स्थान पर कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण कराए जाने का भी निर्णय लिया है.

(संपादक- अब तक योगी की मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग हज पर सब्सिडी का विरोध करते रहे हैं. उन्होंने हर धार्मिक सब्सिडी को तुष्टिकरण बताया लेकिन ये कदम इसके विपरीत है. सरकार के इस कदम से ये भी पुष्टि हो गई है कि हज को ही नहीं हिंदुओं को भी सब्सिडी दी जाती रही है. हज मंजिल और कैलाश मानसरोवर भवन के फैसले में ये ज़रूर देखना होगा कि दोनों जगहों पर जाने वाले यात्रियों की संख्या कितनी होती है. चीन से बेहद सीमित संख्या में वीजा मिलता है. दूसरा ये कि दिल्ली के बॉर्डर पर हज भवन इसलिए बनाने की ज़रूरत है क्यों कि यहां से इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए हज यात्री जाते हैं लेकिन कैलाश मानसरोवर यात्रा का केन्द्र दिल्ली है ही नहीं. मकसद सिर्फ सांप्रदायिक कार्ड खेलना है.)

3) नेता ना करें ठेकेदारी का काम

सीएम योगी ने कहा कि पार्टी का कोई नेता या जनप्रतिनिधि कोई भी ठेकेदारी का काम ना लें. इसके बजाय उन्‍हें निरीक्षण करना चाहिए. यदि उन्‍हें किसी तरह की गड़बड़ दिखती है तो वे मुझे सूचना दे सकते हैं ताकि दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सके. साथ ही पंजीकृत दागी फर्गों एवं माफिया किस्म के ठेकेदारों का पंजीयन समाप्त कर अच्छी संस्थाओं एवं व्यक्तियों को मौका दिया जाए.

(संपादक-इस नियम की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है सिर्फ इतना होगा कि जो लोग पहले से ठेकेदारी कर रहे हैं उन्हें अवैध तरीके से रोक दिया जाएगा. संविधान सभी को रोजगार का अधिकार देता है नेता होने के कारण इस काम से किसी को रोका ही नहीं जा सकता यानी ये फैसला ज़ुबानी जमा खर्च से ज्यादा कुछ नहीं)

4) कोई भूखा नहीं मरेगा

सीएम योगी ने कहा कि जिन गरीबों की कोई सुनवाई नहीं होती थी हम उनके लिए काम करने वाले हैं, ये बीजेपी की सरकार यूपी के एक भी व्यक्ति को भूखा नहीं सोने देगी. किसी जनपद में अगर भूख या बीमारी से किसी व्यक्ति की मौत हुई तो संबंधित जिलाधिकारी एंव सीएमओ दंडित होंगे.

(संपादक-ये नियम पूरे देश में पहले से ही लागू है. अधिकारी इससे बचने के लिए मौत का कारण बीमारी बता देते हैं. आगे भी यही होगा. सिर्फ मीडिया में नाम कमाने का ही फायदा इस योजना से होगा.