राजनाथ सिंह सिंह का मकान खाली कराना चाहते हैं योगी, कानून तक बदलने की तैयारी

राजनाथ सिंह सिंह का मकान खाली कराना चाहते हैं योगी, कानून तक बदलने की तैयारी




नई दिल्ली: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का अगला निशाना राजनाथ सिंह और नारायण दत्त तिवारी जैसे दिग्गजों पर है. खबरों के मुताबिक योगी जल्द ही लखनऊ में राजनाथ सिंह का सरकारी बंग्ला खाली कराने के आदेश दे सकते हैं. इतना ही नहीं नारायण दत्त तिवारी, अखिलेश यादव, मुलायम सिंह और मायावती के बंगले भी खाली कराए जा सकते हैं. इसमें एक तीर से दो निशाने साधे जाने की राजनीति दिखाई दे रहीहै. एक तो सीएम के दावेदार रहे राजनाथ को भी ताकत दिखाई जा सकती है और दूसरा विपक्षी नेताओं को भी सड़क का रास्ता दिखाया जा सकता है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के सदन में पारित किए गए  फैसले को पलटने की तैयारी कर रही है. ये फैसला सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश को निष्क्रिय करने की नीयत से लाया गया था.

दर असल 12 साल पहले 2004 में लोक प्रहरी नामक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल कर सरकार यूपी के एक नियम को चुनौती दी थी. याचिका में कहा गया था कि सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों को करोड़ों का आवास आवंटित कर रही है. फैसले को रद्द किया जाए. अगर इसे रद्द नहीं किया गया तो बाकी राज्यों पर भी इसका असर पड़ेगा. कई साल तक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार निर्णय सुनाया कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले दो महीने के अंदर खाली कराए जाएं.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जवाब में तत्कालीन अखिलेश सरकार ने महीने भर के अंदर 30 अगस्त 2016 को विधानसभा में उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध) (संशोधन) विधेयक-2016 पारित करा लिया. जिसके तहत मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्यमंत्री के वेतन भत्तों को पुनरीक्षित किया गया.

इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत उन्हें सरकारी आवास तथा अन्य सुविधाएं भी इस विधेयक से मिल गईं.

यही नहीं इसके बाद खुद तत्कालीन सीएम अखिलेश ने मुख्यमंत्री रहते हुए अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बगल का आवास अपने नाम एलॉट कराया और वहां रहने लगे. इस समय बतौर पूर्व सीएम अखिलेश का वही निवास है.

लेकिन सूत्रों का कहना है कि योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही लागू करने की तैयारी कर रही है हालांकि बिल पास होने के बाद अब ये संभव नहीं है. इसके लिए सरकार संशोधन बिल को लेकर कानूनी राय ले रही है. माना जा रहा है कि प्रदेश की पहली कैबिनेट मीटिंग में सीएम योगी इस पर फैसला ले लेंगे.