बीबीसी का ज्ञान परक लेख, ओरल सेक्स के बारे में सोचने से भी पहले ये पढ़ें

बीबीसी का ज्ञान परक लेख, ओरल सेक्स के बारे में सोचने से भी पहले ये पढ़ें

बहुत से लोगों को लगता है कि ओरल सेक्स सुरक्षित है, क्योंकि इससे गर्भ ठहरने की चिंता नहीं रहती है और इससे किसी बीमारी से ग्रस्त होने का ख़तरा भी कम होता है.

लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक़ यह मानना ग़लत है. उनका कहना है कि सुरक्षित तरीके से ओरल सेक्स न करने से यौन संबंध बनाने के दौरान होने वाली बीमारियों (एसटीडी) का ख़तरा रहता है.

ओरल सेक्स से जुड़ी पांच ऐसी ही मान्यताओं पर हमने दो विशेषज्ञों से उनकी राय ली.

पहला भ्रम- मुंह से एसटीडी नहीं फैलता

यह ओरल सेक्स को लेकर प्रचलित सबसे आम मिथक है. लेकिन यह पूरी तरह से ग़लत है. मैड्रिड के इंस्टीट्यूट ऑफ़ सेक्सुअल मेडिसिन के विशेषज्ञ मारियानो रोज़ेलो गाया ने बताया, ” यह बात पूरी तरह ग़लत है. ओरल सेक्स के दौरान एसटीडी फैलने की आशंका रहती है.” इसका उदाहरण देते हुए वो कहते हैं कि ओरल सेक्स से ह्यूमन पापील्यूमा वायरस (एचपीवी) के संक्रमण, जेनाइटल हर्प्स या सुजाक के संक्रमण का ख़तरा रहता है. वो कहते हैं, ” ज़रूरत इस बात की है कि इन बातों को लेकर लोगों, ख़ासकर युवाओं को शिक्षित किया जाए, क्योंकि लोग ओरल सेक्स के संक्रमण से होने वाली बहुत सी बीमारियों के संपर्क में आ सकते हैं.”

दूसरा भ्रम- ओरल सेक्स से पहले अपने दांत साफ नहीं करने चाहिए

कुछ लोगों का यह मानना है कि ओरल सेक्स से पहले उन्हें टूथब्रश नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे मुंह जख़्मी नहीं होगा. इसलिए एसटीडी फैलने की आशंका भी नहीं रहेगी. हालांकि यह भी एक आधारहीन मिथक है. मारियानो रोज़ेलो कहते हैं, ”ओरल सेक्स और सामान्य स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि मुंह का स्वास्थ्य ठीक बना रहे.” इसलिए अच्छा यह है कि अगर मुंह में से किसी तरह से ख़ून आ रहा है तो ओरल सेक्स से बचें. इससे भी संक्रमण का ख़तरा रहता है.

तीसरा भ्रम- ओरल सेक्स के दौरान किसी तरह का बचाव ज़रूरी नहीं

यह भी एक ग़लत धारणा है. मैड्रिड के इंस्टीट्यूट ऑफ़ सेक्सुअल मेडिसिन के विशेषज्ञ कहते हैं, ”अगर दोनों पार्टनर एसटीडी की आशंका को ख़त्म करने के लिए पूरी तरह से अध्ययन नहीं करते हैं, तो उन्हें हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए, वह भी केवल गर्भधारण करने के लिए ही नहीं.” मारियानो रोज़ेलो गाया के मुताबिक़ ओरल सेक्स में अगुवाई कर रहे पुरुष को कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए, वहीं इसकी उलट अगर महिला अगुवाई कर रही है तो उसे लेटेक्स पैच का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि म्यूकस मेंमब्रेन या म्यूकोसा संक्रमण फैलने का प्रमुख रास्ता है.

चौथा भ्रम- स्खलन से पहले लिंग को निकालने से संक्रमण नहीं होता

विशेषज्ञों के मुताबिक़ यह भी सही नहीं है, क्योंकि स्खलन से पहले निकलने वाले द्रव में भी संक्रमण फैलाने की क्षमता होती है. मारियानो रोज़ेलो गाया कहते हैं, ”एसटीडी से बचाव रोकथाम के तरीकों (इसके लिए कंडोम का इस्तेमाल कर सकते हैं) या मेडिकल टेस्ट के ज़रिए एसटीडी के संक्रमण का पता किया जाना चाहिए.”

पांचवा भ्रम- ओरल सेक्स से केवल एसटीडी का ख़तरा होता है

बार्सिलोना के सेक्सोलॉजी इंस्टीट्यूट के सह निदेशक और स्पेनिश फ़ेडरेशन ऑफ सोसाइटी ऑफ़ सेक्सोलॉजी के अध्यक्ष डॉक्टर फ्रांसिस्का मोलेरो रोड्रिग्ज़ कहते हैं कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है. हालांकि ओरल कैंसर का एक प्रमुख कारण तंबाकू है. लेकिन कुछ मामलों में इसे ह्यूमन पापील्यूमा वायरस के संक्रमण से भी जोड़ा जाता है. जननांगों में बनने वाले मस्से के पीछे भी इसी का हाथ होता है. मारियानो रोज़ेलो गाया कहते हैं कि इस वायरस का संक्रमण ओरल सेक्स के ज़रिए हो सकता है, इससे कैंसर भी हो सकता है. लेकिन ये ख़तरे भी लोगों को ओरल सेक्स का आनंद उठाने से नहीं रोक सकते हैं.

मोलेरो रोड्रिग्ज़ कहते हैं, ”ओरल सेक्स काम क्रिया का व्यापक होता तरीका है जो कि आनंददायक भी हो सकता है.” वो कहते हैं कि एनल सेक्स और सामान्य सेक्स की तुलना में इसमें जोख़िम कम है. लेकिन इसे सुरक्षा के उपाय के साथ करना चाहिए. कंडोम और फ्लेवर्ड लुंब्रिकेंट्स इसका मज़ा बढ़ा सकते हैं. (लेख बीबीसी हिंदी से साभार)