आज स्वर्ग में पंडित नेहरू ने पार्टी दी होगी, अंतरिक्ष में उनका सपना पूरा हुआ

आज स्वर्ग में पंडित नेहरू ने पार्टी दी होगी, अंतरिक्ष में उनका सपना पूरा हुआ

नई दिल्ली: आज जब भारत एक साथ 104 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजकर दुनिया में अपना झंडा बुलंद कर रहा है तो स्वर्ग में पंडित नेहरू जश्न मना रहे होंगे. ये तो पता नहीं कि इसरो की इतनी ऊंची उड़ान की उन्होंने कल्पना की थी या नहीं लेकिन आज इसरो जहां है उसका बीज उन्होंने ही बोया है. आज जिस इसरो में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी और वैज्ञानिक काम कर रहे हैं कभी ये संस्थान बेहद संघर्षों के बीच बनाया गया था.

पंडित नेहरू वैज्ञानिक भारत के विकास के स्वप्न दृष्टा थे . उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में कई पहल कीं. नेशनल फर्टिलाइजर की स्थापना करना. देश में रसायनिक खाद बनाना और खेती की मदद करना. आज अगर यूरिया भारत में बनता है तो वो भी पंडित नेहरू  का ही योगदान है. 1969 में स्थापित, इसरो अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए तत्कालीन भारतीय राष्ट्रीय समिति (INCOSPAR) स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और उनके करीबी सहयोगी और वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के प्रयासों से 1962 में स्थापित किया गया.

. विक्रम साराभाई ने 15 अगस्त 1969 को इसरो की स्थापना की थी. आपको जानकर हैरत होगी की हमारे वैज्ञानिक आसमान मुट्ठी करने के सफर पर साइकिल और बैलगाड़ी के जरिए निकले थे. वैज्ञानिकों ने पहले रॉकेट को साइकिल पर लादकर प्रक्षेपण स्थल पर ले गए थे. इस मिशन का दूसरा रॉकेट काफी बड़ा और भारी था, जिसे बैलगाड़ी के सहारे प्रक्षेपण स्थल पर ले जाया गया था.

इससे भी ज्यादा रोमांचकारी बात यह है कि भारत ने पहले रॉकेट के लिए नारियल के पेड़ों को लांचिंग पैड बनाया था. हमारे वैज्ञानिकों के पास अपना दफ्तर नहीं था, वे कैथोलिक चर्च सेंट मैरी मुख्य कार्यालय में बैठकर सारी प्लानिंग करते थेभारत का पहला उपग्रह, आर्यभट्ट, जो 19 अप्रैल १९७५ सोवियत संघ द्वारा शुरू किया गया था यह गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था बनाया.

1980 में रोहिणी उपग्रह पहला भारतीय-निर्मित प्रक्षेपण यान एसएलवी -3 बन गया जिस्से कक्षा में स्थापित किया गया. इसरो बाद में दो अन्य रॉकेट विकसित किये रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पग्रहों शुरू करने के लिए ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी),भूस्थिर कक्षा में उपग्रहों को रखने के लिए ध्रुवीय कक्षाओं और भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान.

ये रॉकेट कई संचार उपग्रहों और पृथ्वी अवलोकन गगन और आईआरएनएसएस तरह सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम तैनात किया उपग्रह का शुभारंभ किया.जनवरी 2014 में इसरो सफलतापूर्वक जीसैट -14 का एक जीएसएलवी-डी 5 प्रक्षेपण में एक स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया गया.

इसरो एक चंद्रमा की परिक्रमा, चंद्रयान -1 भेजा, 22 अक्टूबर 2008 और एक मंगल ग्रह की परिक्रमा, मंगल आर्बिटर मिशन है, जो सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश पर 24 सितंबर 2014 को भारत ने अपने पहले ही प्रयास में सफल होने के लिए पहला राष्ट्र बना.

दुनिया के साथ ही एशिया में पहली बार अंतरिक्ष एजेंसी में एजेंसी को सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा तक पहुंचने के लिए ईसरो चौथे स्थान पर रहा.

भविष्य की योजनाओं मे शामिल जीएसएलवी एमके III के विकास (भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए) ULV, एक पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान, मानव अंतरिक्ष, आगे चंद्र अन्वेषण, ग्रहों के बीच जांच, एक सौर मिशन अंतरिक्ष यान के विकास आदि.

इसरो को शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए साल 2014 के इंदिरा गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. मंगलयान के सफल प्रक्षेपण के लगभग एक वर्ष बाद इसने २९ सितंबर २०१५ को एस्ट्रोसैट के रूप में भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला स्थापित किया.

जून २०१६ तक इसरो लगभग 20 अलग-अलग देशों के 57 उपग्रहों को लॉन्च कर चुका है, और इसके द्वारा उसने अब तक 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर कमाए हैं.

 

ये है इसरो की प्रगति यात्रा

1962: परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया. केरल स्थित थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (टीईआरएलएस) पर काम शुरू हुआ.

1963: टीईआरएलएस से 21 नवम्बर को पहला साउंडिंग रॉकेट छोड़ा गया.

1965: थुम्बा में अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किया गया.

1968: गुजरात के अहमदाबाद में प्रायोगिक उपग्रह संचार भू:केन्द्र स्थापति किया गया.

1969: परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत 15 अगस्त को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का गठन हुआ.

1971: आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अतंरिक्ष केंद्र की स्थापना की गई.

1972: अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) की स्थापना और इसरो को इसके अंतर्गत लाया गया. बंगलोर (बेंगलुरू) में इसरो अंतरिक्ष केन्द्र की स्थापना और अहमदाबाद में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र की स्थापना की गई.

1975: अमेरिकी उपग्रह का उपयोग कर उपग्रह निर्देशात्मक टेलीविजन प्रयोग. भारत ने 19 अप्रैल को पहला उपग्रह आर्यभट्ट प्रक्षेपित किया.

1979: भाष्कर:1 प्रयोगात्मक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा गया. रोहिणी उपग्रह के साथ उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएलवी:3) की पहली प्रायोगिक उड़ान. उपग्रह कक्षा स्थापित नहीं किया जा सका.

1980: एसएलवी:3 की दूसरी प्रायोगिक उड़ान सफल, रोहिणी कक्षा में स्थापित.

1981: एसएलवी:3 से रोहिणी कक्षा में स्थापित. प्रायोगिक भू स्थैतिकी उपग्रह एप्पल का प्रक्षेपण. तत्कालीन सोवियत संघ के रॉकेट से भाष्कर:2 का प्रक्षेपण.

1982: संचार उपग्रह इनसेट:1ए अमेरिकी रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित.

1983: इनसेट:1बी के सफल प्रक्षेपण के साथ ही इंसेट श्रंखला स्थापित.

1984: भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने रूसी अंतरिक्ष स्टेशन सलयुत 7 में आठ दिन बिताए.

1987: एसआरओएसएस उपग्रह के साथ संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान (एएसएलवी) की पहली उड़ान विफल.

1988: रूसी रॉकेट से इंडियन रिमोट सेंसिंग (आईआरएस) उपग्रह आईआरए:1ए भेजा गया. एसआरओएसएस उपग्रह के साथ संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान (एएसएलवी) की दूसरी उड़ान विफल.

1991: आईआरएस:1बी का दूसरा प्रक्षेपण सफल.

1992: एएसएलवी ने सफलतापूर्वक एसआरओएसएस:सी उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया. इनसेट श्रृंखला के पहले स्वदेश निर्मित उपग्रह इनसेट:2ए का सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया.

1993: आईआरएस:1ई को ले जा रहे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) की पहली प्रायोगिक उड़ान विफल.

1994: एएसएलवी की चौथी उड़ान के साथ एसआरओएसएस:सी 2 अभियान सफल. पीएसएलवी ने सफलतापूर्वक आईआरएस:पी2 को कक्षा में स्थापित किया.

1996: पीएसएलवी ने आईआरएस:पी3 के साथ उड़ान भरी.

1997: आईआरएस:1डी के साथ पीएसएलवी की पहली पूर्ण उड़ान.

1999: पीएसएलवी ने विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजना शुरू किया.

2001: भू तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के साथ जीसैट:1 उपग्रण का सफल प्रक्षेपण.

2002: पीएसएलवी ने कल्पना:1 उपग्रह प्रक्षेपित किया.

2004: जीएसएलवी की पहली पूर्ण उड़ान के द्वारा एडुसेट उपग्रह प्रक्षेपित.

2006: श्रीहरिकोटा में दूसरा उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र प्रयोग के लिए अधिकृत. पीएसएलवी के द्वारा काटरेसेट एवं हैमसेट भेजा गया.

2007: स्पेस कैप्स्युल रिकवरी एक्सपेरिमेंट द्वारा काटरेसेट एवं दो अन्य विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक भेजा गया.

2012: 100वें अंतरिक्ष अभियान के तहत पीएसएलवी फ्रांस एवं जापान के उपग्रहों को लेकर रविवार सुबह 9.51 बजे अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ.