UP चुनाव: अकेले फरवरी में तोड़ी गईं अंबेडकर की 4 मूर्तियां 

UP चुनाव: अकेले फरवरी में तोड़ी गईं अंबेडकर की 4 मूर्तियां 




नई दिल्ली: यूपी में चुनाव चल रहे हैं और दलित वोटों को प्रभावित करने के लिए एक के बाद एक कई जगहों पर अंबेडकर की मूर्तियों को या तो खंडित किया जा रहा है या उन्हें विद्रूप किया जा रहा है.  पिछले एक हफ्ते में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं. ज्यादातर मामले या तो बीजेपी शासित हरियाणा के हैं या चुनावी राज्य यूपी के संवेदनशील इलाकों के. इन हमलों के पीछे राजनीतिक साजिश भी है . इस साजिश का विश्लेषण हम बाद में करेंगे पहले आपको बताते हैं कि हमले कहां और कैसे हुए .

मंगलवार, 21 फरवरी, संत कबीर नगर

अमर उजाला की खबर के मुताबिक जिगिना गांव में स्थापित बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर की मूर्ति को मंगलवार रात कुछ अराजक लोगों ने क्षतिग्रस्त कर दी.

राजेंद्र कुमार, राजकुमार, पूर्णवासी, रामदरश, राम कृपाल, मोहम्मद हकीक, रंगराजन आदि ने बताया की दस फरवरी 2009 को सार्वजनिक जमीन में बाबा साहेब की प्रतिमा स्थापित हुई थी. 19 फरवरी की रात में भी अज्ञात लोगों द्वारा ईंट-पत्थर मूर्ति पर फेंका गया था, लेकिन मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई. मंगलवार रात में दुबारा अराजक तत्वों ने फिर मूर्ति को तोड़ने की कोशिश की गई. जिसमें मूर्ति की दाएं हाथ की अंगुली टूट गई, जबकि कोट और गले पर क्रेक होने के निशान हैं.

मंगलवार, 21 फरवरी 2017, बुलंदशहर

अमर उजाला की ही खबर हैं कि सोशल साइट पर संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर की फोटो के साथ छेड़छाड़ कर सोशल साइट पर डाल दी गई. इससे गुस्साए दलित समाज ने तहरीर देकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की है.

साथ ही चेताया है कि आरोपी पर कार्रवाई नहीं की गई तो समाज के लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे. सिविल कोर्ट में भानुप्रकाश और संसपाल सिंह ने बताया कि फूलपुर निवासी युवक ने 18 फरवरी को संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर का फोटो गलत मंशा से छेड़छाड़ कर सोशल साइट  पर पोस्ट कर दिया. देखते ही देखते अंबेडकर के इस अपमान से दलित समाज में आक्रोश फैल गया. काफी संख्या में आक्रोशित दलित समाज के लोग लामबंद होकर मंगलवार को कोतवाली पहुंचे.

25 फरवरी 2017 मंडी आदमपुर, हिसार

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक गांव बगला में गुरुवार रात को असामाजिक तत्वों ने अंबेडकर पार्क में लगी डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को खंडित कर दिया. जैसे ही लोगों को सुबह इस बात का पता चला तो उन्होंने इस बात की सूचना गांव के सरपंच राजेंद्र कुमार को दी. जिस पर सरपंच ने मौके पर पहुंचकर इस बारे में आदमपुर पुलिस को अवगत करवाया.

सूचना मिलने पर आदमपुर थाना प्रभारी रघुवीर सिंह मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली. बाद में सरपंच गांव के गणमान्य लोगों दलित समाज के लोगों के साथ बैठक कर मूर्ति की रिपेयरिंग करवा दी एवं पुलिस को शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की. थाना प्रभारी रघुवीर सिंह ने बताया कि पुलिस ने सरपंच के बयान पर अज्ञात के खिलाफ धारा 295 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

बुधवार, 8 फरवरी 2017, पटौदी, गुड़गांव

पत्रिका की खबर के मुताबिक पटौदी उपमंडल के हेलीमंडी पालिका क्षेत्र में वार्ड-6 के अंबेडकर भवन परिसर में डा. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को अज्ञात शरारती तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया. इस घटना के बारे में मंगलवार सुबह पता चला. बात फैलते ही स्थानीय दलित समुदाय के पुरूष व महिलाएं भी मौका पर पहुंच गई. पटौदी थाना में अंबेडकर सभा हेलीमंडी के प्रधान रामकिशन रेवाडिय़ा की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

ये सभी मामले एक खास समय पर सामने आए हैं. सभी मामलों में आरोपी अज्ञात लोग हैं. सभी वारदातें उस समय हुईं जब यूपी में चुनाव चल रहा है. जानकारों का कहना है कि अंबेडकर की प्रतिमा को खंडित करना दलित वोटों के ध्रुवीकरण का एक तरीका है. अगर दलित गुस्से में आते हैं तो इसका सीधा असर उनके वोटों के बीएसपी की तरफ जाने में बदल सकता है. दूसरे शब्दों में कहें तो एसपी और कांग्रेस का गठबंधन इससे कमजोर होगा . जाहिर है इसका फायदा बीजेपी को मिलेगा क्योंकि उसकी विरोधी पार्टियों के वोट बंटेंगे.

हरियाणा में हमले इसलिए हुए क्योंकि यूपी में ज्यादा हमलों को अंजाम नहीं दिया जा सकता था. वहां चुनाव का माहौल है हरियाणा में बीजेपी की सरकार है इन हमलों को करना आसान होगा. जाहिर बात है असर यहां हुए मामलों का भी यूपी में होगा. थोड़ा गुस्सा दलितों में बीजेपी के लिए होगा भी तो होता रहे वो वैसे भी बीजेपी का वोटबैंक नही है.

लेकिन जानकारों का एक तबका इससे अलग राय रखता है. उसका कहना है कि इसका फायदा सीदे तौर पर मायावती को होगा. ऐसे लोगों को इसमें बीएसपी का हाथ लगता है. लेकिन बीएसपी का इस तरह के षड्यंत्र करने का कोई पुराना इतिहास नहीं है. इसलिए बीएसपी को संदेह का लाभ मिल सकता है लेकिन क्लीनचिट उसे भी नहीं दी जा सकती.