ये है गुरमैहर कौर और यूपी चुनाव का कनैक्शन, क्या ये वोट की राजनीति है?

नई दिल्ली:  गुरमैहर कौर का एक साल पुराना वीडियो आचानक खबरों में कैसे आ गया. अचानक रामजस कॉलेज में एबीवीपी के कार्यकर्ता आइसा वालों पर क्यों टूट पड़े? उमर खालिद जेएनयू कांड के बाद से लगातार भाषण दे रहा है और कम से कम 100 भाषण अब तक हो चुके हैं लेकिन अभी विरोध क्यों?  कहीं ये चुनाव का मामला तो नहीं. जानकारों का कहना है कि यूपी में चुनाव के कारण बीजेपी लगातार पिछड़ रही है. खुद पीएम मोदी अब पूर्ण बहुमत की बात कर रहे हैं. कमजोर पड़ती पार्टी ने पहले कब्रस्तान और श्मशान का मुद्दा उठाकर धार्मिक ध्रुवीकरण कोशिश की.

उन्होंने दिवाली और ईद पर बिजली के बंटवारे पर भी सवाल उठाया. मकसद था कि धर्म के मुद्दे को गरमाकर यूपी की राजनीति में इसका फायदा उठाया जाए. लेकिन इस बयान के दूसरे दिन ही अखिलेश यादव ने गुजरात के गधे वाला बयान दे दिया. इस बयान ने बीजेपी के सारे किए कराए पर पानी फेर दिया . सारा विमर्श गधे के इर्द गिर्द चला गया. इसके बाद बाकी के चुनाव के लिए बीजेपी के पास सिर्फ राष्ट्रवाद का मुद्दा बचा था.

विश्लेषकों का मानना है कि इसके कथित राष्ट्रभक्ति को मुद्दा बनाकर जानबूझकर एबीवीपी को इस टकराव के लिए आगे किया गया. इनका मानना है कि ये मुद्दा भड़कने की कोई वजह नहीं थी. उमर खालिद भी लगातार भाषण देता रहा है इस बार भी कुछ खास नहीं होने वाला था. गुर मैहर कौर का वीडियो तो पूरे एक साल पुराना है. अबतक कोई विवाद नहीं हुआ. गुर मैहर के वीडियो का आधा हिस्सा उठाकर विवाद पैदा किया गया.

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