राष्ट्रपति के भाषण में आने वाले बजट के संकेत, हमने आपके लिए DECODE किया भाषण

राष्ट्रपति के भाषण में आने वाले बजट के संकेत, हमने आपके लिए DECODE किया भाषण

नई दिल्लीर: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति के संबोधन से एक चीज़ साफ हो गई है कि कैश निकालने पर सरकार ने जो नरमी बरती है वो फौरी है आने वाले समय में नकदी का इस्तेमाल करना आसान नहीं रहेगा और हो सकता है कि सरकार एटीएम से एक हद से ज्यादा कैश निकालने पर शुल्क लगा दे. ये हद काफी कम हो सकती है क्योंकि कैश न निकालने की सीमा ज़रा सी बढ़ाने पर ही अधिसंख्य आबादी उसके दायरे से निकल जाएगा.
ये भी संभव है कि सरकार कैश लेन देन पर टैक्स लगा दे. राष्ट्रपति का संबोधन उनके निजी विचार नहीं होते बल्कि कैबिनेट उसे तैयार करता है और राष्ट्रपति जो भी कहते हैं वो सरकार की नीति का हिस्सा होता है. 68वें गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्याह पर अपने संबोधन में नोटबंदी और कैशलेस ट्रांजैक्शान पर जो भी कहा उसका मतलब था का कि भविष्ट का लेनदेन नकदी में ही होगा.
उन्होंैने उम्मी द जताई कि नोटबंदी के फैसले का अच्छाष असर होगा और इससे अर्थव्यावस्थां में पारदर्शिता आएगी. मतलब साफ है कि देश कैशलेस की तरफ बढ़ेगा. हाल में जो राहत मिली है वो नोटबंदी से परेशान देश के घावों पर मरहम लगाने से ज्यादा कुछ नहीं.
राष्ट्र पति ने कहा, ‘हमारी अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक गतिविधियों के बावजूद अच्छा प्रदर्शन कर रही है. नोटबंदी की वजह से भले ही अस्थासयी तौर पर आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है लेकिन कालेधन से लड़ने के लिए लागू की गई नोटबंदी का अच्छा असर होगा और डिजिटल पेमेंट से लेन-देन में भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी.
जितना ज्यारदा कैशलेस ट्रांसजैक्शदन होगा, हमारी अर्थव्येवस्थान की पारदर्शिता में उतना ही ज्यांदा सुधार होगा.’ यानी सरकार कैश लेस के मामले में अपने रुख पर नरम नहीं हुई है और ये सिलसिला जारी रहने वाला है.
प्रणव मुखर्जी ने कहा, ‘अशांति से परिपूर्ण क्षेत्र में भारतीय लोकतंत्र स्थाायित्वा के सुखद जगह की तरह है. हमारा लोकतंत्र कोलाहलपूर्ण है, लेकिन हम चाहते हैं हमारा लोकतंत्र बढ़े, कम न हो. हमारी परंपरा में कभी असहिष्णु समाज की नहीं बल्कि तर्कवादी समाज की प्रशंसा की गई है. एक मजबूत लोकतंत्र सहिष्णु ता, धैर्य और दूसरों के लिए सम्माकन की मांग करता है.’
सरकार चुनाव आयोग के साथ मिलकर पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के रास्ते पर भी कदम बढ़ा सकती है. राष्ट्रपति के संबोधन में इसकी ओर साफ इशारा है. राष्ट्र पति ने कहा, ‘हमारे लोकतंत्र की मजबूती यह है कि 2014 के आम चुनाव में 66% से अधिक मतदाताओं ने मतदान किया. अब चुनावी सुधारों पर रचनात्मक परिचर्चा करने का भी समय आ गया है.

राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श कर इस कार्य को आगे बढ़ाना चुनाव आयोग का दायित्व है.’ मतलब साफ है. ये भी संभव है कि लोकसभा चुनाव नज़दीक आते आते राजनीतिक चंदे को भी पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव आ जाए. सरकार चाहेगी कि आने वाले चुनाव में वो इसका फायदा उठाए. ये अलग बात है कि देश मे अगर सारा लेनदेन कैशलेस होने लगेगा तो राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग नंबर दो में करने के लिए धन ही नहीं बचेगा.
प्रणव मुखर्जी ने अपने संबोधन में गरीबों और गांवों की स्थिति सुधारने की भी बात की. उन्होंाने कहा, ‘हमें गांव के लोगों के लिए ज्यादा सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए जिससे उनका जीवन अच्छा हो सके. हमें कृषि को बढ़ावा देना चाहिए.
हमें युवाओं को रोजगार देने और औद्योगिक विकास के लिए अवसरों को विकसित करना है. गांधी जी का सपना, हर आंख से आंसू पोछने का अभी पूरा नहीं हुआ है. अभी भी जनसंख्या का पांचवा हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करता है. हमें अपने लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए और परिश्रम करना होगा.’