राहुल को दोस्ती के सिले में अखिलेश से धोखा मिला? चुनाव में इस छवि से कैसे जाएंगे अखिलेश?

राहुल को दोस्ती के सिले में अखिलेश से धोखा मिला? चुनाव में इस छवि से कैसे जाएंगे अखिलेश?




नई दिल्ली: भले ही सार्वजनिक मंच से कांग्रेस कुछ न कहे लेकिन सीटों के तोल मोल में अखिलेश यादव का रवैया राहुल गांधी के करीबियों को चकित कर देने वाला है. राहुल के करीबी सूत्रों के मुताबिक आज अगर अखिलेश के पास साइकिल है. पार्टी पर उनका कंट्रोल है. उस सबके पीछे कहीं न कहीं राहुल गांधी का योगदान है.

अक्टूबर 2016 बल्कि उससे पहले से राहुल गांधी लगातार अखिलेश का साथ दे रहे हैं. शुरूआती दौर में जब अखिलेश को मुलायम सिंह और शिवपाल यादव ने कसना शुरू किया तो राहुल गांधी ही थे जिन्होंने अखिलेश को न सिर्फ हिम्मत दी बल्कि हर कदम पर राजनीतिक समर्थन का भरोसा भी देते रहे. अगर रामगोपाल यादव का हाथ और राहुल गांधी का साथ न होता तो अखिलेश कभी इतनी बड़ी लड़ाई का साहस भी न कर पाते.

KnockingNews.com लगातार इसकी खबर भी आपको देता रहा है कि कैसे राहुल और अखिलेश कंधे से कंधा मिलाकर यूपी में रणनीति बना रहे थे. लेकिन ताज़ा पैंतरेबाज़ी ने सबको निराश किया है. राहुल के नज़दीकी इसे धोखेबाजी मान रहे हैं.

इन लोगों का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा खुले दिल से साथ दिया और किसी भी तरह की सीटों की बातचीत हुए बगैर ही गुलाम नबी आज़ाद ने एक तरफा गठबंधन की घोषणा कर दी. शीला दीक्षित ने भी अपनी मुख्यमंत्री पद से दावेदारी वापस ले ली.

अखिलेश के साथ गठबंधन की ही वजह से यूपी में सबसे पहले चुनाव अभियान शुरू करने वाली कांग्रेस पार्टी ने पिछले 3 महीने से उसे ढीला छोड़ा हुआ था . राहुल के नज़दीकी एक नेता का कहना था- ‘शराफत की भी हद होती है. राजनीति में इतना निश्छल भी भला कोई होता है’

उधर राजनीति मामलों के जानकारों का मानना है कि ये अखिलेश और कांग्रेस के बीच की नूरा कुश्ती है. अगर अखिलेश नानुकुर के बगैर सीटें राहुल गांधी को सोंप देंगे तो समाजवादी पार्टी के उन कार्यकर्ताओं को धक्का लगेगा जो टिकट का सपना संजोये बैठे है. दूसरी तरफ राहुल गांधी भी कोई समझौता करने की हालत में नहीं हैं. कई कांग्रेस के वर्तमान विधायकों की सीटों पर भी समाजवादी पार्टी कब्जा जता रही है. साहिबाबाद सीट पर तो वर्तमान विधायक ने बीएसपी छोड़कर कांग्रेस जॉइन की. अब वही सीट समाजवादी पार्टी हथियाने को तैयार बैठी है.

उधर इसे कांग्रेस की नाराज़गी कहें या दबाव की रणनीति पार्टी लगातार रणनीति बनाने में लगी है  इस सिलसिले में 10 जनपथ पर हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी मौजूद थे. पार्टी ने चुनाव के लिए मीटिंग में उम्मीदवारों की सूची भी तैयार कर ली है. लेकिन इनकी घोषणा रविवार को होगी.

बैठक के बाद उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उम्मीदवारों की लिस्ट बन चुकी है. गठबंधन की तस्वीर रविवार सुबह तक साफ हो जाएगी. वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि सपा के साथ वार्ता में कोई रुकावट नहीं है.

इस बीच, देर रात कांग्रेस सूत्रों ने संकेत दिए कि अखिलेश यदि 105 सीट के लिए भी हामी भर देते हैं, तो कांग्रेस इसके लिए राजी होने को तैयार है. हालांकि, सपा नेता नरेश अग्रवाल ने दिल्ली में कहा कि कांग्रेस की 120 सीटों पर अड़े रहने की जिद से गठबंधन की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है.

कांग्रेस नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी अब भी सपा से गठबंधन की हर मुमकिन गुंजाइश तलाश रही है. इसकी दूसरी रणनीति यह है कि गठबंधन नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी अखिलेश पर मढ़ी जाए. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि साइकिल चुनाव चिह्न मिलने से पहले अखिलेश 140 सीटें देने पर राजी थे. साइकिल मिलने के बाद इसे घटाकर 120 कर दिया और फिर आखिरी वक्त में सौ से भी नीचे आ गए. कांग्रेस जब इस पर नहीं मानी तो सपा ने पहले दोनों चरणों के लिए अपने सभी उम्मीदवारों का एलान कर दिया.