मोदी को नहीं मिला टाइम “पर्सन ऑफ द ईयर” का खिताब, संपादकों ने नहीं माना काबिल

मोदी को नहीं मिला टाइम “पर्सन ऑफ द ईयर” का खिताब, संपादकों ने नहीं माना काबिल




प्रधानमंत्री टाइम मैगजीन के खिताब पर्सन ऑफ द ईयर को हासिल करने की दौड़ में हार गए हैं. प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन द्वारा कराए गए ‘पर्सन ऑफ द ईयर 2016’ के ऑनलाइन रीडर्स पोल में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे रहे थे लेकिन “पर्सन ऑफ द ईयर” कौन होगा इसका आखिरी फैसला मैगजीन का संपादक मंडल करता है.

टाइम के “पर्सन ऑफ द ईयर” की दौड़ में अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा, विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज, फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग और अमेरिकी नेता हिलेरी क्लिंटन शामिल थीं. टाइम पत्रिका 1927 के बाद से उस व्यक्तित्व को ‘पर्सन ऑफ दि ईयर’ चुनती आयी है जिसने साल भर में ‘बेहतरी या बदतरी के लिए’ ‘खबरों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया.’

इस रेस में रूस के राष्ट्रसपति व्लािदिमीर पुतिन, अमेरिका की जिम्ना स्टी साइमन बाइल्सप, उत्त र कोरिया के नेता किम जोंग उन और गायिका बेयोंसे नोल्सि भी शामिल थे. साल 2010 में फेसबुक के सह संस्थाापक मार्क जकरबर्ग, 2011 में दुनियाभर में हुए प्रदर्शनों में शामिल हुए लोगों को, 2012 में बराक ओबामा, 2013 पोप फ्रांसिस, 2014 में इबोला बीमारी से लड़ने वाले लोग और 2015 में जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल को टाइम “पर्सन ऑफ द ईयर” चुना गया था. इस बार का खिताब अमेरिकी के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिया गया है.

2016 के पर्सन ऑफ द ईयर के लिए चल रहा पोल रविवार (4 दिसंबर) को  समाप्त हुआ था. पोल में भारतीय पीएम मोदी को सर्वाधिक 18 प्रतिशत लोगों ने पर्सन ऑफ इ ईयर चुना था. वहीं बराक ओबामा, डोनाल्ड  ट्रंप और विकीलीक्सर के संस्थाोपक जूलियन असांज को सात-सात प्रतिशत वोट मिले. रेस में शामिल हिलेरी क्लिंटन को 4 फीसदी तथा दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को 2 प्रतिशत वोट हासिल हुए.

मैगजीन के अनुसार भारतीय प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद कर दिया और पेरिस क्लाीइमेट समझौते पर दस्तनखत किए हैं. इसके चलते मोदी की लोकप्रियता बढ़ी है. मैगजीन ने बताया, ”ऐसे व्यंक्ति या व्य.क्तियों को चुना जाएगा, जिन्हों ने हमारी जीवन को सही या गलत रूप से प्रभावित किया है और वे उससे जुड़े हुए हैं जो इस साल हमारे लिए अहम था.” पीएम मोदी साल 2014 और 2015 में भी इस रेस में थे. साल 2014 में तो वे दूसरे पायदान पर रहे थे.