क्या सरकार लोगों को बेवकूफ समझती है? क्या सरकार की जुबान की कीमत नहीं ? ज़रा सोचिए

क्या सरकार लोगों को बेवकूफ समझती है? क्या सरकार की जुबान की कीमत नहीं ? ज़रा सोचिए




नई दिल्ली: क्या हमारी सरकार देश को लोगों को बोदा, बेवकूफ या उल्लू समझ रही है. क्या देश में सरकार की जुबान की कोई कीमत नहीं रही. क्या आम नागरिक के साथ सरकार वित्तमंत्री और आरबीआई जब जो चाहे कर सकते हैं?

बातें कड़वी हैं लेकिन सच्ची लगती हैं. 8 नवंबर से अबतक बैंकों में लाइनें हैं और अपना पैसा जमा करना लगभग नामुमकिन है. लोग लगातार परेशान हो रहे हैं.

अपना टैक्स जमा कराने के लिए स्पेशल काउंटर लगाने वाली सरकार जनता की सुविधा के लिए स्पेशल इंतजाम करना तो दूर तीन तीन दिन तक लगातार बैंकों की छुट्टी भी कर रही है. इस परेशानी के बीच सरकार के प्रति लोगों का सिर्फ एक भरोसा था कि बाद मे सबकुछ ठीक ठाक हो जाएगा.

सरकारी लोग लगातार कह रहे थे कि जल्दबाज़ी न करें. बहुत समय है आप अपने पैसे आराम से 30 दिसंबर तक बैंकों में जमा कर सकते हैं. सरकार ने कहा था उसके बाद भी पुराने नोट आरबीआई में जमा करने का अवसर रहेगा.

लेकिन अब सरकार नियम बदल रही है. अब आरबीआई कह रही है कि पांच हजार रुपए से ज्यादा के पुराने नोट जमा कराने पर जमाकर्ता को जबाब देना होगा कि उसने ये नोट बैंक में अब तक क्यों नहीं जमा कराए. हालांकि पांच हजार रुपए तक जमा कराने पर प्रतिबंध नहीं होगा. पूछताछ के समय बैंक के कम से कम दो अधिकारी मौजूद होंगे तथा पूरी पूछताछ ऑन रिकॉर्ड होगी.
आरबीआई का ये अकड़ भरा फैसला क्या देश के लोगों का अपमान नहीं है. क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि वो चोरों को पकड़े उनसे जवाब तलब करे. यहां तो सरकार उल्टे कह रही है कि आप साबित करो कि आप ईमानदार हो वरना हम चोर समझ लेंगे.

क्योंकि पहले सरकार और बैंकों की ओर से लोगों की ओर से कहा जा रहा था कि लोग अपने नोट जमा करवाने के लिए जल्दबाजी न करें और बैंकों में भीड़ न बढ़ाएं. वे आराम से अपनी राशि अपने खातों में जमा करा सकते हैं, लेकिन अब पूछताछ की बात सामने आने के बाद लोगों को लग रहा है कि उन्होंने सरकार और बैंकों पर भरोसा कर गलती की है.
यह तो सबको मालूम ही है कि कालाधन रखने वालों ने पिछले दरवाजों से बैंकों से करोड़ों रुपए बदल लिए. पिछले दिनों लगातार पकड़ा रहे नए नोट इस पूरे मामले की कहानी बयान करने के लिए काफी है. इस सिलसिले में आरबीआई के ही तीन अधिकारी अब तक गिरफ्तार भी हो चुके हैं.
अब यदि 5500 रुपए के पुराने नोट जमा करवाने पर लोगों को बैंक अधिकारियों की पूछताछ का सामना करना पड़े तो यह वाकई उनके लिए शर्मनाक स्थिति होगी क्योंकि कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने सोचा था कि बैंकों में भीड़ छंटने दो फिर आराम से अपने यहां रखे 10-15 हजार रुपए बैंकों में जाकर जमा करवा देंगे, लेकिन बैंकों के ताजा फरमान ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
उल्लेखनीय है कि 30 दिसंबर तक बैंकों में जाकर व्यक्ति अपने खाते में रुपए में जमा कर सकते हैं. अब लोग तो यही कह रहे हैं कि मोदी जी! यह तो ईमानदारी नहीं है. आप तो अपनी ही कही बात से पलट रहे हैं. क्या गारंटी है कि आगे भी आप अपने फैसले नहीं बदलेंगे. ऐसे में तो जनता का भरोसा उठ ही जाएगा.