मदद लेकर घर के बाहर लाइन लगाए लोगों को नंदलाल ने लौटा दिया. कही दिल को छू लेने वाली ये बात

मदद लेकर घर के बाहर लाइन लगाए लोगों को नंदलाल ने लौटा दिया. कही दिल को छू लेने वाली ये बात




दिल्ली से सटे गुरुग्राम में  एक फौजी की फफकते हुए फोटो वायरल हुई थी. इस बुजुर्ग फौजी की फोटो उस समय खींची गई जब वो गुड़गांव में एक बैंक की लाइन में खड़ा था. अचानक वो लाइन से बाहर हो गया और आंखों में आंसू आ गए. नंदलाल नामके इस फौजी की तस्वीर हिंदुस्तान टाइम्स अखबार में छपी और तेज़ी से वायरल हो गई. इसके बाद नंदलाल की मदद करने वालों की लाइन लग गई. लेकिन  पूर्व सैनिक नंदलाल ने सभी की मदद को ठुकरा दिया है. उन्होंने कहा कहा कि उन्हें पेंशन मिलती है, किसी के पैसे की जरूरत नहीं है. 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वक्त सेना में शामिल हुए नंदलाल का कहना है कि बस उन्हें बैंक से पेंशन निकालने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने नंदलाल के हवाले से लिखा है, ‘मुझे पेंशन मिलती है, मुझे किसी के पैसे की जरूरत नहीं है. किसी की भीख नहीं चाहिए, मुझे मेरे पैसे निकालने दीजिए.’

 

तस्वीर के वायरल होने के बाद उनकी मदद के लिए समाज के हर तबके से लोग आगे आए. उनके रिश्तेदार भी उनके किराए के घर में उनके हालचाल लेने के लिए पहुंचने लगे. लोगों ने उनकी मदद करने की बात कही, लेकिन नंदलाल ने किसी की भी मदद लेने से इनकार कर दिया.

उनके किराए के कमरे पर उनसे मिलने पहुंचे उनके भतीजे के हवाले से एचटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘उन्हें पेंशन मिलती है. उनकी बेटी भी पैसा भेजती है. उनके पास पैसों की कमी नहीं है.’ कई लोगों ने नंदलाल का जिस बैंक में अकाउंट से वहां से उनके अकाउंट की जानकारी मांगी है, ताकि उनके अकाउंट में ऑनलाइन पैसे भेजे सकें.

हिंदुस्तान टाइम्स ने नंदलाल की तस्वीर बुधवार को प्रकाशित की थी. तस्वीर में नंदलाल बैंक के बाहर लाइन में खड़े हुए रो रहे थे. वे कैश निकालने के लिए तीन दिन से बैंक के बाहर लाइन में लगे थे, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली. आखिर में वे टूट गए और लाइन में खड़े-खड़े ही रोने लगे. अखबार ने इस तस्वीर का कैप्शन दिया था, ‘उन्होंने तो कहा था केवल अमीर रोएंगे.’ यह तस्वीर इंटरनेट पर काफी वायरल हुई थी. इस तस्वीर के जरिए लोगों ने पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले पर निशाना साधा था.