रेलवे का किराया बढ़ेगा तो भी सरकार की नहीं होगी बदनामी, सरकार की नज़र में काफी कम है किराया

रेलवे का किराया बढ़ेगा तो भी सरकार की नहीं होगी बदनामी, सरकार की नज़र में काफी कम है किराया

रेल का रिकॉर्ड बार किराया बढ़ाने के बावजूद लगता है सरकार का दिल नहीं भरा. अब सरकार चाहती है कि रेल का किराया भी बढ़ता रहे और सरकार की बदनामी भी न हो.

सरकार एक रेग्युलेटर बनाने पर काम कर रही है जो रेल मंत्रालय पैसेंजर और फ्रेट किराए को लेकर सुझाव देगी. ये एजेंसी वैसे होगी जैसे कि दिल्ली में डीईआरसी है जो सरकार को बिजली के दाम बढ़ाने पर सुझाव देती है या फिर ट्राई की तरह जो टेली कम्युनिकेशन के दाम तय करती है.

प्राधिकरण के लिए रेल मंत्रालय प्रस्ताव तैयार कर रहा है. ये प्रस्ताव सरकार के पास भेज दिया जाएगा. मतलब साफ है सरकार की इच्छा लोगों बढ़ते किराये की मार से बचाने का नहीं है बल्कि बढ़ोतरी से होने वाले राजनितक नुकसान से वो बचना चाहती है.
आपको बता दें कि भारत में मालभाड़ा कई यूरोपियन देशों और चीन से भी अधिक हैं. इसकी वजह से हमारा फ्रेट ट्रैफिक रोड ट्रांसपॉर्ट के पास जा रहा है.

हाल में सरकार ने जो रेल किराये बढ़ाने का फैसला किया उससे भी सड़कों पर बोझ बढ़ा और लोग रेल से अपने वाहनों और विमान यातायात की तरफ बढ़े. नये फैसले से क्या होगा सब समझ सकते हैं.
सूत्रों के मुतबिक इस सप्ताह एक प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजा जाना है और इस पर अगले सप्ताह तक मंजूरी मिलने के पूरी आसार है. आपको हमारी खबर याद होगी कि हाल में रेल मंत्रालय ने वित्तमंत्रालय से धन मांगा था ताकि किराया न बढ़ाना पड़े लेकिन उसे नहीं मिला.

इसके बाद आमदनी बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार हुआ. लेकिन कोई रास्ता न देख अब रेल मंत्रालय किराया बढ़ाने का सिरदर्द मोल नहीं लेना चाहता. आपको बता दें कि रेलवे को पैसेंजर किराए पर सब्सिडी देने के कारण प्रतिवर्ष लगभग 33,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. अब ये 33,000 करोड़ रुपये सीधे जनता कि सिर पड़ने वाले हैं.
प्रस्तावित रेलवे डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में एक चेयरमैन और चार मेंबर होंगे. ये रेलवे से नहीं जुड़े होंगे. मंत्रालय को इस बारे में पहले ही कई मंत्रालयों और नीति आयोग से सुझाव मिल चुके हैं.
अधिकारी ने कहा कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के शीर्ष अधिकारियों के साथ चर्चा की है और वे इस तरह की एजेंसी बनाने के पक्ष में हैं. प्रभु ने हाल ही में ईटी को बताया था, ‘प्रस्तावित अथॉरिटी पैसेंजर फेयर और फ्रेट रेट का सुझाव देने के लिए स्वतंत्र होगी.

यह रेलवे के लिए पूरे फेयर स्ट्रक्चर को संतुलित करेगी. यह रेलवे के लिए एक बड़ा बदलाव होगा. हम बाजार की मांग के अनुसार किराए में बदलाव करते रहेंगे.’
अधिकारी ने कहा कि शुरुआती प्रस्ताव किराए तय करने के लिए एक रेगुलेटर बनाने का था, लेकिन अब इसे बदलकर अथॉरिटी कर दिया गया है जो सिर्फ फेयर में बदलाव का सुझाव देगी.

उन्होंने बताया, ‘इस रास्ते से हमें संसद से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी और कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद ही एक रेगुलेटर बनाया जा सकता है.’ प्रस्तावित अथॉरिटी रेलवे के लिए परफॉर्मेंस से जुड़े स्टैंडर्ड भी तय करेगी.
अधिकारी के मुताबिक, ‘इससे हम समय पर पैसेंजर किराए में बदलाव कर पाएंगे. इसके साथ ही फ्रेट रेट तय करने में रेलवे के दबदबे वाली प्रक्रिया भी समाप्त होगी, जिससे हमें फ्रेट ट्रैफिक का काफी नुकसान हुआ है.