मामूली बस कंडक्टर बीजेपी जॉइन करने के बाद बन गया अरबपति. अरबों सफेद करने का आरोप

मामूली बस कंडक्टर बीजेपी जॉइन करने के बाद बन गया अरबपति. अरबों सफेद करने का आरोप




भोपाल: वो मामूली बस कंडक्टर था. मध्यप्रदेश राज्यपरिवार निगम का कंडक्टर. परिवहन निगम कई बार कंगाल हो चुकी है. लेकिन बीजेपी की नेतागिरी इस कंडक्टर को ऐसी रास आई कि आज वो अरबों की संपत्ति का मालिक है. इनकम टैक्स की टीम ने इस नेता के 8 ठिकानों पर छापे मारे तो सुशील वासवानी नाम के इस नेता की अंधाधुंध दौलत का पता चला. अपने कॉपरेटिव बैंक के जरिए वासवानी ने कई बड़े नेताओं का कालाधन सफेद किया था. और मध्यप्रदेश बीजेपी के ज्यादातर नेताओं के उससे करीबी संबंध थे.

खास बात ये है कि वासवानी तीन पुश्तों से बीजेपी से जुड़ा रहा है. इसके पिता और दादा भी बीजेपी से जुड़े थे और इमरजेंसी के दौरान जेल काट चुके थे.

आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक सुशील वासवानी और उनका परिवार महानगर बैंक के जरिए ब्लैक मनी को वाइट करने का काम कर रहा था.

इस समय वासवानी और उनका परिवार अरबों की संपत्ति का मालिक है. फर्श से अर्श तक के सफर में वासवानी ने बहुत जल्दी ऊंचाई हासिल की है. उन्होंने महानगर सहकारी बैंक की स्थापना की थी. अभी उनकी पत्नी इसकी अध्यक्ष हैं. 1992 में इस बैंक का उद्घाटन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया था.

इस बैंक के संचालक मंडल में शिवराज मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य उमाशंकर गुप्ता और संघ के वरिष्ठ सदस्य शशिभाई सेठ के नाम भी हैं. आयकर सूत्रों के मुताबिक यह जानकारी मिली थी कि महानगर कोऑपरेटिव बैंक के जरिए बड़े पैमाने पर पुराने नोट बदले गए हैं. आरोप यह भी हैं कि मोटी रकम लेकर बैंक के संचालकों ने काला पैसा सफेद किया है. इनकम टैक्स के अधिकारी लंबे समय से वासवानी और उनके परिजनों पर नजर रखे हुये थे. मंगलवार सुबह 8 टीमों ने 8 जगह पर एक साथ कार्रवाई शुरू की.

प्राथमिक जांच में जो जानकारी सामने आयी है उसके मुताबिक सुशील वासवानी और उसका परिवार कई अरब की सम्पत्ति के मालिक हैं. राज्य सरकार के राज्य सहकारी आवास संघ के अध्यक्ष रहे सुशील वासवानी पर आवास संघ में हेराफेरी करने के आरोप भी लगे थे लेकिन उनके रसूख और ऊंची पहुंच के चलते उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नही हुई थी.

इस बीच संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी शशिभाई सेठ ने यह माना है कि सुशील वासवानी से उनके करीबी रिश्ते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वासवानी के कारोबार से उनका कोई लेना-देना नही हैं. सेठ इस समय संघ की विद्या भारती शाखा का काम देख रहे हैं. वे संघ द्वारा संचालित शारदा विहार स्कूल की समिति के चेयरमैन भी हैं. वासवानी के यहां छापों के बाद बीजेपी के उन नेताओं में खलबली मच गयी है जिन्होंने पिछले 40 दिन में बड़े पैमाने पर काला धन सफेद करवाया है.