नोटबंदी के बाद अब महंगाई की बारी, जानिये किस चीज़ पर पड़ेगी मार

नोटबंदी के बाद अब महंगाई की बारी, जानिये किस चीज़ पर पड़ेगी मार




नई दिल्लीः डॉलर के मुकाबले रुपया आज रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था. आज रूपया डॉलर के मुकाबले 30 पैसे टूटकर 68.86 पर रहा जो कि 2013 के बाद रुपये का सबसे निचला स्तर है. इससे पेट्रोल डीजल महंगे होंगे जिसका असर बाज़ार में बढ़ती महंगाई के तौर पर हो सकता है.

जानकारों के एक वर्ग का कहना है कि इसके पीछ नोटबंदी के चलते सोने का बेतहाशा आयात है. इसमें भी काफी हद तक आयात गैर कानूनी तरीके से तस्करी के ज़रिये लाए गए सोने से हुआ. विदेशों से सामान लाने के लिए डॉलर की ज़रूरत होती है इसलिए रुपये के मुकाबले डॉलर की मांग बढ़ी.

हालांकि ज्यादा बड़ा तबका मानता है कि तेल कंपनियों की तरफ से डॉलर की मांग बढ़ने के चलते डॉलर को मजबूती मिल रही है. वहीं 9 नवंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत ने भी डॉलर को मजबूत करने की दिशा में सहारा दिया. रुपये की लगातार गिरावट के पीछे मुख्य वजह विदेशी फंडों की लगातार निकासी बताई जा रही है. इसके अलावा अमेरिका की केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से भी रुपये का स्तर गिर रहा है.दरअसल अमेरिका में अगले महीने ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़कर 94 फीसदी पर चली गई है, ऐसे में डॉलर 14 साल की ऊंचाई पर है. अमेरिका में इकोनॉमी के अच्छे आंकड़ों से भी डॉलर को सपोर्ट मिला है, जबकि नोटबंदी से घरेलू बाजार में रुपये पर दोहरा दबाव है.

वैसे गिरावट के बीच अच्छी खबर ये रही कि रुपया अपने दिन के 68.86 के निचले रिकॉर्ड स्तर के बाद रुपये ने थोड़ा संभला. आखिर में में डॉलर के मुकाबले रुपया 17 पैसे टूटकर 68.73 के स्तर पर बंद हुआ. ये भी अगस्त 2013 के बाद रुपये का सबसे निचला स्तर है.

आर्थिक जानकारों के मुताबिक माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह 70 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच सकता है. रुपया गिरता है तो इन चीज़ों के दामों पर पड़ता है असर

रुपये की गिरावट का इन चीजों पर होगा असर

रुपये की गिरावट से विदेशों से आने वाली हर चीज़ का दाम बढेगा. सामान महंगे होंगे जिससे वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे.

सरकारी घाटा बढ़ेगाः रुपए में कमजोरी से देश के सरकारी घाटे पर दबाव बढ़ने लगता है इसके चलते सरकार को खर्चों पर कंट्रोल करती है जिसका सीधा असर विकास के कामों पर हाता है.

पेट्रोल-डीजल होंगे महंगेः भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों के इंपोर्ट में जाता है और ये डॉलर में भुगतान किया जाता है. रुपए में गिरावट की वजह से कच्चे तेल के इम्पोर्ट बिल (आयात बिल) महंगे हो सकते हैं जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो सकती है.

विदेश में पढ़ाई और घूमना होगा महंगाः डॉलर महंगा होने और रुपया सस्ता होने से विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाएगी. इसके अलावा विदेशी पर्यटन की लागत भी बढ़ सकती है. लोगों को विदेश घूमने पर ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा.

पेंट, साबुन, शैंपू इंडस्ट्री पर असरः रुपए में गिरावट बढ़ने से अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी जिससे ये प्रोडेक्ट भी महंगे हो सकते हैं.

 

ऑटो इंडस्ट्री की बढ़ेगी लागतः भारी मात्रा में इम्पोर्ट होने वाले ऑटो और मशीनों के कम्पोनेंट के डॉलर पेमेंट में इजाफा हो सकता है. इसकी वजह से कंपनियों को डॉलर के मुकाबले ज्यादा रुपये देने पड़ेंगे.

माल ढुलाई होगी महंगीः वहीं, क्रूड में अगर कोई गिरावट आती है तो भी रुपए में गिरावट से इसका असर खत्म हो सकता है. डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि महंगे डीजल से माल ढुलाई बढ़ने की आशंका है.