ATM में पैसे न होने की वजह है ये डिब्बा, अभी हफ्ते भर रहेगी कैश की किल्लत

ATM में पैसे न होने की वजह है ये डिब्बा, अभी हफ्ते भर रहेगी कैश की किल्लत

मुंबई: देश भर में सरकार के वादे के बावजूद एटीएम चालू नहीं हो पाए और लोगों का दिन लाइन मे लगे लगे बीता. इस पूरी परेशानी की वजह था ये प्लास्टिक का डिब्बा. सरकार ने फैसला तो ले लिया लेकिन ये नहीं सोचा कि कैसेट नाम का ये डिब्बा नयी करंसी के हिसाब से कहा से आएगा. कैसेट एटीएम के अंदर लगी तिजोरी में रखा जाता है. हर नोट के हिसाब से अलग अलग कैसेट होता है. उस कैसेट का कैलिब्रेशन नोट के आकार के हिसाब से किया जाता है. सरकार ने अचानक 2000 का नोट तो निकाल दिया लेकिन एटीएम में इस नोट के लिए कैसेट ही नहीं हैं. इस वजह से एटीएम में 2000 के नये नोट नहीं रखे जा रहे.

बैंकों के पास सिर्फ सौ रुपये के नोट के हिसाब से कैसेट हैं. वो भी सिर्फ उन एटीएम में है जो ब्रांच के पास होते हैं. दूर के एटीएम में 100 रुपये वाला नहीं बल्कि 500 रुपये वाला कैसेट होता है. यानी एटीएम के जरिए सिर्फ 100 रुपये का नोट उपलब्ध है वो भी ब्रांच के नजदीक वाले एटीएम में. दूर वाले एटीएम में लगाने के लिए नयी करंसी के हिसाब से कैसेट भी नहीं है. 100 रुपये के नोट वाला कैसेट भी जल्दी खाली हो जाता है उसकी वजह भी है. एक कैसेट में सिर्फ 2500 नोट ही भरे जा सकते हैं. यानी सिर्फ ढाई लाख रुपये. जबकि अगर 2000 का नोट भरा जाए तो इसके बीस गुना पचास लाख रुपये कैसेट में आ जाएंगे जिसे खाली होने में वक्त लगेगा.

भारतीय स्टेट बैंक की चेयरमैन अरुन्धति भट्टाचार्या कहती है कि बैंक के पास नोटों की कमी नहीं है. वो कहती हैं कि ‘ATM के कैसेट्स के साइज को configure किया जा रहा है.

भट्टाचार्या ने कहा कि बहुत-सी मशीन एजेंसी के जरिए भी ऑपरेट होती हैं. उन्होंने कहा कि करेंसी उपलब्ध है लेकिन नोट को दूसरे कैसेट में अभी नहीं डाला जा सकता. उन्होंने कहा, ‘कैसेट्स को कॉन्फिगर करने पर काम किया जा रहा है. ब्रांच के नाजदीक के ATM में कैसेट बढ़ाई गई है लेकिन ब्रांच से दूर मौजूद ATM के कैसेट को भी 100 की नोट के हिसाब से बनाया जा रहा है.’

अरुंधति भट्टाचार्य ने आगे कहा, ‘अभी सबकुछ सामान्य होने में लगभग एक सप्ताह का समय लगेगा.’ उन्होंने बताया कि एक कैसेट में सिर्फ 2500 नोट आते हैं. उन्होंने कहा, ‘RBI की तरफ से नोटों की सप्लाई की कोई कमी नहीं है. नोटों की कमी है ऐसा कहना गलत होगा. यह लॉजिस्टिकल प्रॉब्लम है और जल्द ही इसे दूर किया जा सकेगा.’