दिल्ली में त्राहि-त्राहि की नौबत, नोट हाथ में नहीं और महंगाई बढ़नी शुरू

नोटबंदी का असर अब सिर्फ लोगों के लाइन में खड़े होने तक ही सीमित नहीं रहा. राजधानी दिल्ली और एनसीआर में कीमतों पर इसका बेहद बुरा असर पड़ रहा है. रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं. सब्ज़ियों के दाम को लगभग दुगुने  हो गए हैं. इस संवाददाता ने आज बाज़ार में कीमतों का जायजा लिया.

नोटबंदी की सबसे बुरी मार सब्ज़ियों के दामों पर पड़ी है. प्याज़ आसानी से खराब नहीं होती उसे कुछ दिन तक रखा जा सकता है उसके बावजूद प्याज के जाम में काफी बढ़ोतरी देखी गई. दो दिन पहले तक जो प्याज मोर सुपर मार्केट में 16 रुपये किलो बिक रही थी उसका दाम अब 24 रुपये किलो हो गया है. इसी तरह दूसरी सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं. 30 रुपये किलो में मारी मारी फिरने वाली तोरई अब 58रुपये किलो है. दिल्ली की मुर्गा मंडी में दाम आसमान पर हैं और मंडी में माल नहीं है. कल तक माना जा रहा था कि मुर्गा पैसे की किल्लत के कारण कोई खरीदेगा नहीं लेकिन चिकन का दाम काबू से बाहर हो चुका है. दुकानदारों का कहना है कि इसकी दो वजहें हैं. एक तो भुगतान के लिए नकदी न होने के कारण व्यापारी माल नहीं खरीद पा रहे . दूसरा हाईवे पर नकदी की कमी के चलते ट्रक जहां के तहां रुक गए हैं.

परेशानी का सबब ये है कि सड़को से 60 से 70 प्रतिशत ट्रको से माल ढुलाई प्रभावित हो चुका है. इसका असर मंडियों में काम करने वाले हम्माल और मज़दूरों पर भी पड़ा है. मजदूरी के बगैर एक हफ्ते तो काम चल गया लेकिन अब गुजारा मुश्किल हो चला  है. ट्रक न आने के कारण म़ज़दूरों को काम नहीं मिल रहा. दिल्ली और दूसरे राज्यों से ट्रको से माध्यम से बिल्डिंग के समान, स्टेशनी और हार्डवेयर इत्यादि का काम प्रभावित हो चुका है अगर आप ऐसे समझे कि अगर किसी ट्रक व्यापारी के 10 ट्रक है तो सिर्फ दो ही काम कर रहे है बाकि ट्रक खड़े है. दरअसल इस व्यापार में सबसे बड़ी परेशानी कैश को लेकर है यानि कोई व्यापारी कोई सामान पहुंचाता है तो वह कैश में ही पेमेंट करता है तो फिर गुड्स ट्रक व्यापारियों को माल पहुंचाने के लिए कैश की ही जरूरत होती है जिसकी वजह से ये ट्रे़ड प्रभावित हुआ.

बस थोड़ा इंतज़ार..

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