बहिस्कार पर इसलिए हंस रहा है चीन! कौआ कान ले उड़ा

बहिस्कार पर इसलिए हंस रहा है चीन! कौआ कान ले उड़ा




चीन के विरोध के हल्ले और शोर में न तो किसी को इस बात की परवाह है कि वाकई क्या हुआ है. चीन ने कुछ किया भी है या नहीं . और अगर कुछ किया है तो सरकार ने इसके जवाब में कुछ किया क्यों नहीं. अब हम पड़ताल करेंगे इस वायरल खबर की.

खबर अलग अलग वैबसाइट पर वायरल हुई. मेन स्ट्रीम मीडिया ने भी खबर को दिखाया यहां तक कि बीबीसी ने भी खबर को दिखाया लेकिन खबर के सनसनीखेज हैडलाइन को देखकर ही लोग सक्रिय हो गए. किसी ने पूरी खबर पढ़ी ही नहीं. खबर की सबसे अहम जो लाइन इस मामले में नज़रअंदाज़ कर दी गई वो है “चीन का ये प्रोजेक्ट सन 2014 में शुरू हुआ था” यानी पानी रोकने की योजना उससे भी पहले बनी थी. ” इस प्रोजेक्ट को 2019 में खत्म होना है” यानी तबतक पानी पूरी तरह रोकने का सवाल ही नहीं है.

एक और चीज़ ध्यान देने वाली है. अगर चीन अभी से थोड़ा थोड़ा पानी रोककर नहीं रखेगा तो और 2019 में इकट्ठा पानी अपने बांध में भरेगा तो सोचिए भारत का क्या होगा.

एक और अहम पहलू ये हैं कि किसी नदी पर बांध बनाकर आप कितना पानी इकट्ठा कर सकते हैं. क्या ये संभव है कि हमेशा के लिए कोई किसी नदी के पानी को रोक ले. बांध भरने के बाद पानी को तो छोड़ना ही होगा. ये बात सही है कि बांध बनने से सूखे के दिनों में या नदी मे पानी कम होने की हालत में भारत को आने वाले पानी की दिक्कत हो सकती है लेकिन सबसे बड़ सवाल फिर वहीं है. क्या चीन ने सिंधु नदी के पानी की सप्लाई रोकने के आरोपों के बाद ऐसा किया?

सिंधु का पानी रोकने की बात भी मीडिया के दिमाग की ही उपज है. सरकार की तरफ से अभी तक एक भी ऐसा बयान नहीं आया है जिसमें कहा गया हो कि सिंधु नदी का पानी रोका जा रहा है. मीडिया सूत्रों के नाम पर एक के बाद एक ऐसी खबरे दिखा रहा था. अगर सरकार की सीक्रेट मीटिंग थी तो मीडिया में खबर कैसे आई ?

मज़ेदार बात ये है कि मीडिया की खबरों का पाकिस्तान ने फायदा उठाया और उसने पूरी दुनिया में ये प्रचार करने की कोशिश की कि भारत सिंधु नदी का पानी रोकने वाला विलेन है. इसका नतीजा ये हुआ कि संयुक्त राष्ट्र में भी उसने इसकी चर्चा कर दी. पाकिस्तान ने कहा कि अगर भारत ऐसा करता है तो ये युद्ध के बराबर होगा.

वायरल खबर का सच इसी से पता चल सकता है कि भारत सरकार ने चीन के पानी रोकने जैसी चीज़ पर प्रतिक्रिया तक नहीं दी. उसने न तो चीन की शिकायत की न ही सरकार ने कोई एक भी ट्वीट किया. अगर पाकिस्तान सिंधु नदी का पानी रोकने को युद्ध जैसी कार्रवाई कह सकता है तो भारत सरकार ने चीन के खिलाफ कोई आवाज़ क्यों नहीं उठाई. क्या ये सरकार का नकारापन था ? जाहिर है सरकार इतनी उदासी नहीं हो सकती.

 

चीनी सामान के बहिस्कार के अभियान के पीछे कई ऑनलाइन कंपनियों का हाथ भी बताया जा रहा है. सोशल मीडिया पर एक वर्ग का कहना है कि कंपनियां छोटे दुकानदारों के हिस्से का व्यापार हथियाना चाहती है. इसीलिए ये सब हो रहा है.