रिलायंस जियो की सर्विस खराब 65 फीसदी कॉल हो रहे हैं ड्रॉप, इससे भी ज्यादा बुरा हाल इन वजहों से है

रिलायंस जियो की सर्विस खराब 65 फीसदी कॉल हो रहे हैं ड्रॉप, इससे भी ज्यादा बुरा हाल इन वजहों से है




नई दिल्ली : रिलायंस ने मनमोहन सिंह को खुश करके 4G लायसेंस ले लिया. मोदी जी को खुश करके अपना ब्रांड एंबेसडर बना लिया लेकिन समस्या ये हैं कि अंबानी अब सुनील भारती मित्तल और आदित्य बिड़ला को कैसे खुश करें. प्रधानमंत्रियों को जेब से कुछ नहीं देना पड़ता लेकिन इन दोनों उद्योंग की हस्तियों ने अगर अंबानी को खुश किया तो खुद बरवाद हो जाएंगे. इसलिए अब जियो में इन दोनों उद्योगपतियों ने ब्रेक लगा दिया है . कम से कम जियो पर कॉल करना तो अनिश्चितता में फंस ही गया है.  एयरटेल, आईडिया और वोडाफोन ने टेलीकॉम रेगुलेटर- ट्राई से अनुरोध किया है कि उनके घाटे को पूरा करने के लिए इंटरकॉनेक्टिविटी चार्ज बढ़ाया जाए. इन तीनों कंपनियों ने एक बैठक कर यह फैसला लिया. वहीँ रिलायन्स परेशान है जियो से इन कंपनियों को जब लोग फोन करते हैं तो बड़ी परेशानी होती है. ये कंपनियां उसे इंटर कनेक्शन उपलब्ध नहीं करवा रही हैं जिस कारण उसका कॉल ड्राप बढ़ता जा रहा है.

रोज हो रही हैं 1.6 करोड़ कॉल फेल 

रिलायंस का यह भी आरोप है कि एयरटेल, वोडाफोन और आईडिया द्वारा उसे इंटर कनेक्शन न दिए जाने के कारण उसकी कॉल फेल होने का रेट 65 फीसदी बढ़ गया है. रिलायंस और अन्य नेटवर्को के बीच रोज 1.6 करोड़ कॉल फेल हो रहे हैं. वहीं इससे पहले सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज ने कहा, ‘उन्होंने दूरसंचार विभाग और ट्राई से अनुरोध किया है कि वह सर्विस के टेस्ट और उसके कमर्शियल सर्विस से जुड़े मामलों को स्पष्ट करें.’

क्या है इंटर कनेक्टिविटी चार्ज 

ट्राई के नियमों की माने तो जब किसी टेलीकॉम कपनी का उपभोक्ता किसी दूसरी टेलीकॉम कंपनी के उपभोक्ता कॉल करता है तो पहली कंपनी को दूसरी कंपनी यानी कॉल रिसीवर कंपनी को चार्ज दें पड़ता है. यानी अगर कोई रिलायंस जियो का उपभोक्ता एयरटेल के उपभोक्ता को कॉल करता है तो रिलायन्स को प्रति मिनट 14 पैसे एयरटेल को इंटर कनेक्टिविटी चार्ज देना पड़ता है. ऐसे में अगर इंटर कनेक्टिविटी चार्ज बढ़ता है तो उन कंपनियों को ज्यादा लाभ होगा जिनके ज्यादा उपभोक्ता हैं.

इंटर कनेक्टिविटी चार्ज बढ़ाने से रिलायन्स को होगा बड़ा नुकसान

अगर इंटर कनेक्टिविटी चार्ज बढ़ेगा तो रिलायंस को नुकसान उठाना पड़ेगा. क्योंकि देश में 80 प्रतिशत उपभोक्ता एयरटेल, वोडाफोन और आईडिया के हैं. आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा एयरटेल के 25.68 करोड़ यूजर, वोडाफोन के 19.77 करोड़  और आईडिया के 17.64 करोड़ यूजर्स हैं. रिलायंस जियो के आने के बाद बाकि टेलीकॉम कंपनियों को अपने टेरिफ रेट बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जबकि  पहले से ही इन कंपनियों पर करोड़ों का कर्ज है.  सबसे बड़ी बात यो कि जियो फ्री कॉल की बात कर रहा है . अगर ऐसा होता है तो अंबानी को जेब से हर मिनट बातचीत पर 14 पैसे देने होंगे . अब तो ये कंपनियां इसे बढ़ाने की बात भी कर रही है.