यूएन में सुषमा के भाषण के सामने फीके पड़ गए मोदी, पाकिस्तान को आइना दिखा दिया

यूएन में सुषमा के भाषण के सामने फीके पड़ गए मोदी, पाकिस्तान को आइना दिखा दिया




विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र के अपने भाषण में साबित कर दिया उनके मुकाबले भाषण देने में दिल्ली की सरकार नें कोई नहीं है. उनके भाषण में आज एक स्तर था, शैली थी, और जबरदस्त शालीन आक्रामकता थी. उनका भाषण पीएम मोदी के अब तक के सभी भाषओं को फीका करने वाला था. पाकिस्तान पर अपने अंदाज में सुषमा ने जो कहा उसका जवाब पाकिस्तान देना भी चाहे तो नहीं दे पाएगा. उड़ी हमले के बाद पहली बार पाकिस्तान को किसी ज़िम्मेदार पद पर बैठे एक सख्श ने सटीक जवाब दिया है.

सुषमा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया- सुषमा ने जब कहा कि जिनके घर शीशे के हों उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए. तो घरों में टीवी देख रहे लोग खुशी से उछल पड़े,

सुषमा स्वराज ने आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा, ”सभी को ये स्वीकार करना होगा कि आतंकवाद मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघन है. क्योंकि वो निर्दोष लोगों को निशाना बनाता है. बेगुनाहों को मारता है. वो किसी देश का नहीं मानवता का दुश्मन है.”

विदेश मंत्री ने अपने भाषण में बलूचिस्तान का भी मुद्दा उठाया. उनका कहना था, ”21 तारीख को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में मानवाधिकार उल्लंघन हो रहा है. मैं बस यही कहूंगी कि जिनके घर शीशे के हों वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते. आप देखिए बलूचिस्तान में क्या हो रहा है.”

बातचीत के लिए शर्तें रखने के पाकिस्तानी पक्ष के बारे में सुषमा स्वराज ने कहा, ”हमारे प्रधानमंत्री ने शपथ ग्रहण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बुलाया. हमारे प्रधानमंत्री काबुल से जाते समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिलने गए. मैं पाकिस्तान गई. क्या कोई शर्त थी. कोई शर्त नहीं थी. मित्रता की बात थी. बदले में भारत को पठानकोट मिला, उड़ी मिला. बहादुर अली जैसा आतंकवादी मिला जो ज़िंदा है और सबूत है कि वो पाकिस्तान का नागरिक है.”

विदेश मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि पाकिस्तान अगर ये समझता है कि वो अपनी बयानबाजियों से भारत के किसी हिस्से को अलग कर लेगा तो मैं कहना चाहूंगी कि, ”जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है.”

इससे पहले सुषमा ने अपने भाषण में उन देशों को अलग थलग करने की भी बात कही जो चरमपंथियों को पनाह देते हों. उनका कहना था, ”आतंकवादियों को पनाह कौन देता है. उन्हें धन कौन देता है. हथियार और संरक्षण कौन देता है. ये सवाल हैं.”

हिंदी में दिए अपने भाषण में उनका कहना था, ”इतिहास गवाह है कि जिस किसी ने भी हिंसा के बीज बोए हैं उसे उसका कड़वा फल खाने को मिला है. जो छोटे छोटे आतंकी समूह काम कर रहे थे अब वो एक बड़ा समूह बन गया है जिसके अनगनित हाथ पांव मुंह हैं.”