दिल्ली में क्या सिर्फ हिंदुओं को शादी करने का हक? अफसर रजिस्टर नहीं करते दूसरे धर्म की शादियां

दिल्ली में क्या सिर्फ हिंदुओं को शादी करने का हक? अफसर रजिस्टर नहीं करते दूसरे धर्म की शादियां




दिल्ली देश की राजधानी है और भारत के सबसे आधुनिक शहरों में शुमार मानी जाती है लेकिन नीचे दी गई जानकारी आपको चौका देगी. दिल्ली में सबसे ज्यादा शादियों के रजिस्ट्रेशन सिविल लाइन्स इलाके में होते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो यहां के एसडीएम को शादी के कानून केबारे में सबसे ज्यादा जानकारी होनी चाहिए. लेकिन यहां के एसडीएम साहब कहते हैं कि वो सिर्फ हिन्दू विवाह अधिनियम और स्पेशल मैरिज एक्ट के अनुरूप ही पंजीकरण करते हैं.ये जानकारी बाकायदा सरकारी रिकॉर्ड पर दी गई है और दिल्ली सरकार के पोर्टल पर भी इसका रिकॉर्ड मौजूद है.

दिल्ली में प्रेमी जोड़ियों की शादियां करवाने वाली विश्वप्रसिद्ध संस्था लव कमांडो के संस्थापक संजय सचदेव कहते हैं कि दूसरे धर्म के को रजिस्टर कराने के लिए हिंदू रीतिरिवाज़ से शादी करने के लिए मजबूर क्यों हों ? क्यों दूसरे धर्म की शादियों का दिल्ली में रिजस्ट्रेशन नहीं हो सकता.

मामला को समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले तक जाना होगा ट्रांसफर पेटिशन नंबर 291 / 2005 में सुप्रीम कोर्ट में आदेश दिया कि दिल्ली में किसी भी तरह की शादियां हों चाहे वो हिंदू, मुसलिम, सिख ईसाई गंधर्व, वौद्ध या ईसाई पद्दिति हों. सरकार को सभी शादियों को रजिस्टर करना ही होगा. इस आदेश को मानते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल ने 21 अप्रैल 2014 को गजट अधिसूचना भी जारी कर दी. इसके बावजूद दिल्ली के अफसरान इसका पालन करने को तैयार नहीं हैं इस से परेशां हो कर लव कमांडोज़ ने दिल्ली सरकार के पब्लिक गरीएवंस मैनेजमेंट सिस्टम पर शिकायत कर कहा था की हिन्दू के साथ साथ मुस्लिम, सिख, गन्धर्व, बौद्ध, ईसाई अदि विवाह भी पंजीकृत होने चाहिए

उधर लव कमांडोज़ ने इसकी शिकायत उपराज्यपाल के लिसनिंग पोस्ट पर कर डी है.