क्या गांधी ISIS का मुकाबला कर पाते? क्या अहिंसा हरा पाती? 

क्या गांधी ISIS का मुकाबला कर पाते? क्या अहिंसा हरा पाती? 

नई दिल्ली:  कश्मीर में चल रही अशांति की स्थिति और हाल के समय में वहां पर हुए कुछ जातियों पर अत्याचार की घटनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह ने एक कार्यक्रम में हिंसा और उसके तमाम ‘विनाशकारी’ प्रभावों पर अपनी चिंता जतायी.

डॉ. कर्ण सिंह ने अहिंसा पर आधारित एक किताब ‘गिव नॉनवायलेंस अ चांस’का विमोचन करते हुए शुक्रवार रात कहा कि अगर अब भी हमारे पास एक ऐसा समाज है जो दूसरे देशों या दूसरे धर्मों के बारे में अपने बच्चों को घृणा का पाठ पढ़ाता है, सिखाता है तो उनसे अहिंसक स्थिति में बड़े होने की उम्मीद करना बेईमानी होगी. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया लगभग हर जगह हो रहे क्षेत्रीय हिंसा को देखते हुए मानव जाति के अस्तित्व पर सवाल खड़े होने लाजमी हैं.

डॉ. कर्ण सिंह कश्मीर के अंतिम राजा हरि सिंह के पुत्र हैं और कांग्रेस से राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं. पुस्तक विमोचन के दौरान श्रोताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा आज हमने विनाश के हथियार की खोज कर ली है. मानव जाति का अस्तित्व रहेगा या नहीं यह सवाल अब भी बना हुआ है क्योंकि दुनिया के सामने दो बड़े खतरे – अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद या जलवायु परिवर्तन आज भी मुंह खोले खड़े हैं और बड़ी बात तो ये कि इनमें से कोई एक भी सबका खात्मा करने के लिए काफी है. इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रख्यात गांधीवादी कार्यकर्ता नीलकंठ राधाकृष्णन भी मौजूद थे.

डॉ. कर्ण सिंह ने अंत में पूछा कि क्या हिटलर को अहिंसा से हराया जा सकता था? क्या आईएसआईएस को अहिंसा से परास्त किया जा सकता है? हमें अपने आसपास की वास्तविकताओं का सामना करना होगा. हमने अपने कार्यक्रमों और चेतना में बदलाव लाना होगा ताकि इन कारकों का संज्ञान ले सकें. किताब के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि यह राधाकृष्णन की शांति के तरफ एक ‘अनोखी’ पहल है.