हिंसा का पैरोकार है अमेरिका

नई दिल्ली: दशकों से अमिरका ने न्यूक्लियर और केमिकल हथियारों को सुरक्षित करने और दुनिया से आतंकवाद को खत्म करने का बीड़ा उठा रखा है. इस मकसद से सद्दाम हुसैन और कर्नल गद्दाफी के साथ- साथ ओसामा बिन लादेन का सफाया कर दिया गया और इसे वैश्विक अमन के लिए जरूरी करार दिया गया. लेकिन अमेरिका के अपने आंकड़े उसके इस अंतरराष्ट्रीय बीड़े का मखौल उड़ा रहे हैं.
जी हां, अभी बुधवार की घटना लीजिए. अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित सैन बर्नाडिनो में कुछ हमलावरों ने एक कम्युनिटी सेंटर पर अंधाधुंध फायरिंग कर 14 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. वैसे तो अमेरिका में सिरफिरों की फायरिंग की घटना थोड़ी आम बात है. लेकिन सरकार के अपने आंकड़े बता रहे हैं कि अमिरका में अंधाधुन फायरिंग का मामला प्रतिदिन एक बार होता है. शूटिंग ट्रैकर द्वारा जारी आंकडों के मुताबिक कैलिफोर्निया का यह शूटआउट साल 2015 का 355वां मामला था. साल के 365 दिनों में अभी भी कुछ दिन बीतने बाकी हैं.

अमेरिका की 70 फीसदी जनसंख्या देश के पूर्वी तट के नजदीक बसी हुई है. शूटआउट की इन 355 घटनाओं में अधिकांश घटनाएं इसी तट के इर्द-गिर्द घटी है. अमेरिकी अखबार में छपे इस नक्शे को गौर से देखिए. प्रत्येक लाल निशान इन 355 घटनाओं को दर्शा रहा है और हर निशान में लिखा अंक उस फायरिंग में मारे गए लोगों का संख्या बता रहा है.

अब इस बात से आपको साफ-साफ अंदाजा लग गया होगा कि वास्तव में अमेरिका कितना अशांत देश है. यहां रह रहे नागरिकों और विदेशी मूल के लोगों पर कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है. इसके बावजूद आपको यह जानकर हैरत होगी कि इस देश में रिवॉल्वर, रायफल और पिस्टल के साथ-साथ अत्याधुनिक हथियार खरीदना भारत में एक बोतल शराब खरीदने जैसा है. जी हां, अभी पिछले हफ्ते अमेरिका का ऑनलाइन रीटेल मार्केट ब्लैक फ्राइडे के चलते सुर्खियों में था. इस दौरान अमेरिका में घोषित अवकाश के साथ-साथ कंपनियों की तरफ से सेल बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े डिस्काउन्ट ऑफर दिए जाते हैं. इस ऑफर से जहां अमिरकी कंपनियां अपना पुराना स्टॉक सस्ते में बेचकर नए स्टॉक के लिए गोडाउन में जगह बनाती हैं वहीं ज्यादातर अमेरिकी साल भर इस दिन का इंतजार करते हैं कि वह अपना पसंदीदा सामान आधे से कम दामों में खरीद सके.

आपको जानकर हैरानी होगी कि कैलिफॉर्निया फायरिंग के लिए हमलावरों ने हथियार इसी ब्लैक फ्राइडे सेल से खरीदी थी. इसके साथ ही महज एक दिन की इस सेल के दौरान लाइसेंसी दुकानों और ऑनलाइन स्टोर से लगभग 2 लाख (1 लाख 85 हजार) हथियार खरीदे गए. इनमें उन हथियारों की गड़ना नहीं है जो गैरलाइसेंसी दुकानों से खरीदे जाते हैं. यकीन मानिए कि अमेरिका में गैरलाइसेंसी दुकानों से दुनिया का कोई भी हथियार खरीदा जा सकता है.
ऐसे में क्या अमेरिका के लिए संभव है कि विश्व शांति की उसकी कोशिशें कामयाब हो सकती है जबकि उसके अपने घर में इस कदर आग लगी हुई है.

बस थोड़ा इंतज़ार..

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