केजरीवाल का 100 करोड़ का भर्ती घोटाला !

नई दिल्लीः अब तक चीन आदि देशों में कम्युनिस्ट सरकारें सरकारी पैसे से पार्टी का कॉडर खड़ा करने के लिए यह तरीका अपनाती थीं। यानी  सत्ता मिलने के बाद सरकार पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं को विभागों में सेट कर पेड वर्कर बना लेती थी। ताकि उनकी रोटी का इंतजाम हो सके। मगर, देश में दिल्ली सरकार ने यह करिश्मा कर दिखाया है। आरटीआई कार्यकर्ता विवेक गर्ग ने खुलासा किया है कि केजरीवाल सरकार ने ICSIL नामक कंपनी से अनुबंध कर बैकडोर से सैकड़ों सीधी भर्तियां तमाम विभागों में 2015 से की हैं। भर्ती में वही लोग शामिल हुए, जो कि पार्टी से जुड़े थे। न टेंडर-न विज्ञापन। किसी को खबर ही नहीं हुई।  इस पूरे खेल का ताना-बाना भ्रष्टाचार के मामले में हाल ही में जेल गए केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार ने बुना । बताया जा रहा कि इसमें भर्तियों में पैसा भी खूब चला। करीब सौ करोड़ का खेल कंपनियों ने किया। विवेक गर्ग ने इस मामले की एसीबी जांच की मांग की है।
 
कैबिनेट बैठक में चहेती कंपनी से भर्ती कराने का फैसला

भर्ती खेल करने के लिए पहले से तैयार पूरे प्लान को कैबिनेट बैठक में मंजूरी दिलाई गई। ताकि सवाल उठे तो कहा जा सके कि यह तौ कैबिनेट से पास हुआ है। केजरीवाल की कैबिनेट ने विभागों में खाली पदों पर संविदा नियुक्ति के लिए ICSIL कंपनी के साथ ज्वाइंट बेंचर को मंजूरी दी। सूत्र बता रहे, इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से सभी विभागों को मौखिक व लिखित दोनों रूप में आईसीएसएल कंपनी के जरिए ही संविदा भर्तियां करने का फरमान जारी हुआ।

77 कंपनियों के जरिए ‘आप’ कार्यकर्ताओं को बांटी नौकरियां

दिल्ली सरकार ने तमाम विभागों में खाली पदों पर संविदा भर्तियों के लिए आईसीएसएल कंपनी से करार किया। बाद में इस कंपनी ने 77 अन्य छोटी कंपनियों को इम्पैनल करते हुए जोड़ दिया। विवेक के मुताबिक इन 77 कंपनियों में ज्यादातर कंपनियां जेल गए केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के अप्रत्यक्ष स्वामित्व की हैं। मतलब दिल्ली की सरकार ने ढाल के तौर पर ICSIL कंपनी खड़ी की। इसकी आड़ में 77 कंपनियों से चहेते लोगों को सरकारी नौकरी देने का खेल हुआ।

क्या होना चाहिए भर्ती का नियम

पारदर्शिता के लिए जरूरी है कि किसी भी विभाग में नियमित या संविदा पदों पर भर्ती के लिए अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित किए जाएं। ताकि खुली प्रतियोगिता हो। सभी को जानकारी हो सके। अरि किसी प्राइवेट एजेंसी से करार कर सरकार भर्ती कराना चाहती है तो इसके लिए पहले सरकार को टेंडर निकालना चाहिए। ताकि सभी इच्छुक कंपनियां इसमें भाग लें। जिस कंपनी की शर्त सबसे आसान हो उसी कंपनी को मौका मिले। मगर केजरीवाल सरकार ने बगैर टेंडर के चहेती कंपनी से ही करार कर लिया।

नौकरी पाने वाले लोगों और कंपनियों के पृष्ठिभूमि की एसीबी जांच की मांग

आरटीआइ कार्यकर्ता विवेक गर्ग इंडिया संवाद से कहते हैं कि बैकडोर से नौकरी पाने वालों में ज्यादातर आम आदमी कार्यकर्ता हैं। इस प्रकार उन्हें नौकरी देकर केजरीवाल ने सरकारी पैसे से पार्टी का दिल्ली में पेड काडर खड़ा कर लिया है। जिससे कि हर चुनाव में मदद मिले। करार वाली मुख्य कंपनी ICSILके साथ जुड़ी 77 अन्य कंपनियों का स्वामित्व आप के नेता व प्रधान सचिव रहे राजेंद्र कुमार करते हैं। लिहाजा दिल्ली सरकार में बड़े पैमाने पर हुए संविदा भर्ती घोटाला की एसीबी या अन्य किसी विजिलेंस एजेंसी से जांच कराई जाए।

सवाल-मांग रहे जवाबसंविदा भर्ती प्रक्रिया में सर्विस प्रदाता कंपनियों को जोड़ने के लिए टेंडर क्यों नहीं हुआ

मुख्यमंत्री कार्यालय व कैबिनेट से एक ही कंपनी ICSIL को सीधे जोड़ लेना क्या नियमों को ठेंगा नहीं दिखाता

भर्ती से पहले टेंडर व विज्ञापन की शर्तों को क्या पूरा किया गया

फोटो-आईसीएसआईएल कंपनी से जुड़ी 77 अन्य कंपनियों की सूची। इनमें से ज्यादातर कंपनियों का इनडायरेक्ट संचालन राजेंद्र कुमार के करने बात सामने आ रही।

साभार : इंडिया संवाद डॉट कॉम










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