अगली बार राजनाथ नहीं अमितशाह होंगे गृहमंत्री, ये है मोदी का प्लान !

अडवाणी के टिकट कटने की खबरों के बीच इस चुनाव की लिस्ट की सबसे अहम खबर से सबका ध्यान हट गया है. खबर ये है कि इस चुनाव के बाद अगर बीजेपी की सरकार वापस आती है तो गुजरात मॉडल पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा. मोदी को नज़दीक से जानने वाले मानते हैं कि अमित शाह को गांधी नगर से मैदान में उतारने के पीछे मकसद उन्हें अगला गृहमंत्री बनाने का है.

अगर ये प्लान कामयाब होता है तो आंतरिक सुरक्षा, बॉर्डर सिक्योरिटी, और बाकी चीज़ें सीधे मोदी शाह और डोभाल की टीम के हाथ में होंगी. दूसरे शब्दों में कहें तो साक्षी माहाराज की भविष्यवाणी की तर्ज पर मोदी ऐसे हालात पैदा करने में कामयाब हो सकते है जिनमें वो अगर न चाहें तो भारत में चुनाव भी न हों.

इन विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा की विजय के बाद मोदी के साथ टीम में सिर्फ गुजरात से लाए हुए लोग और अफसर होंगे जो उनके पुराने साथी हैं और एक इशारे पर काम में लग जाते हैं. इन लोगों का मानना है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के मंत्रिमंडल में होने के कारण ज्यादातर मामलों में मोदी उस तरह एक तरफा एजेंडा लेकर नहीं चल पाते जैसा वो चाहते हैं.

मोदी को जानने वालों का कहना है कि वो युवा नेताओं को कैबिनेट में लेंगे और गडकरी, राजनाथ, जेटली जैसे नेताओं को स्वास्थ्य जैसे मामलों का हवाला देकर आसानी से कमजोर किया जा सकेगा. पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी राजनाथ सिंह को देने की ज्यादा संभावना है राजनाथ सिंह ज्यादा महत्वाकांक्षी नेता भी नहीं हैं और मोदी के लिए खतरा नहीं हो सकते.

इस एजेंडे को अंजाम देने के लिए ही मोदी ने गांधी नगर जैसी सेफ सीट पर शाह को लगाया इसके लिए अडवाणी को काफी मशक्कत के बाद राजी किया गया. लेकिन भाजपा के संस्थापक, भारतीय राजनीति के सबसे उम्र दराज लाल कृष्ण आडवाणी को क्रॉस कर पाना इतना आसान नहीं था. सूत्र बताते हैं इसके लिए मोदी ने खुद कई बार पहल की. कई बार चर्चा में आडवाणी से उनके चुनाव लड़ने का जिक्र छेड़ा, लेकिन आडवाणी ने पहले कभी स्पष्ट जवाब नहीं दिया.

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय अधिवेशन तक शीर्ष नेतृत्व यह साहस नहीं जुटा पा रहा था. बताते हैं 75 साल से अधिक उम्र के लोगों को टिकट देने या न देने के निर्णय में भी सबसे.बड़ी बाधा आडवाणी ही थे. लेकिन ऑपरेशन बालाकोट ने भाजपा नेतृत्व और मोदी को उत्साह से भर दिया.

बताते हैं आखिरी पहल भी आडवाणी जी के सामने की गई. उनसे खुद चुनाव न लड़ने और अपने पसंद के उम्मीदवार को बताने के लिए कहा गया. प्रस्ताव में गांथीनगर की सीट से आडवाणी जी की बेटी को उम्मीदवार बनाने तक का प्रस्ताव हुआ.

आडवाणी ने कहा कि उन्होंने जीवन भर राजनीति में परिवारवाद का विरोध किया है. इसके बाद आडवाणी ने मंतव्य समझकर गांथीनगर से चुनाव न लड़ने की इच्छा जाहिर की और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मोदी से मशविरा करके उम्मीदवार बदल लिया.