क्या घोटाले से नाराज़ पर्रिकर ने ही राहुल गांधी को दी थी राफेल की फाइल ?

राफेल डील पर अब एक नया दस्तावेज़ सामने आया है जो कहता है कि राफेल मामले में पीएमओ बीच में घुसा और उसने रक्षा मंत्रालय के साथ चल रही सौदेबाजी के समानांतर बातचीत शुरू कर दी. जो दस्तावेज सामने आया है वो ऐसा पत्र है जो रक्षा मंत्रालय ने पीएमओ को लिखा था. पत्र में इस बात पर एतराज जताया गया था और कहा गया था कि आपके समानांतर सौदेबाजी करने से हमारी बातचीत पर बुरा असर पड़ रहा है.

माना जा रहा है कि ये कागज़ उसी फाइल का हिस्सा है जिसका जिक्र पर्रिकर के लीक हुए फोन में था. माना जा रहा है कि वही फाइल पर्रिकर ने राहुल को दी और उसी फाइल को राहुल ने द हिंदू अखबार में प्लांट कराया और उसी हिंदू की खबर को साथ राहुल ने मोदी के पर हमला बोला है.

ये कागज़ एक मजबूत लिंक है जो कहती है कि राफेल सौदे में खुद मोदी शामिल थे. इससे पहले रक्षामंत्री और मोदी इस बात का खंडन कर चुके हैं.

अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने खुलासा किया है कि फ्रांस सरकार के साथ राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से किए जा रहे डील के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दखल का फायदा फ्रांस को मिला था. पीएमओ के इस दखल का रक्षा मंत्रालय ने विरोध भी किया था.

राफेल डील को लेकर देश में जारी विवाद थमता नहीं दिख रहा है. अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने खुलासा किया है कि फ्रांस सरकार के साथ राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से की जा रही डील के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दखल का फायदा फ्रांस को मिला था. पीएमओ की इस दखल का रक्षा मंत्रालय ने विरोध भी किया था. अब इसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे तौर इसमें हस्तक्षेप किया था.

अंग्रेजी अखबार का कहना है कि 7.87 बिलियन डॉलर के विवादित राफेल डील पर दोनों देशों की ओर से शीर्ष स्तर पर हो रही बातचीत में पीएमओ के ‘सामानांतर दखल’ का भारतीय रक्षा मंत्रालय ने जमकर विरोध किया था. पीएमओ के ‘सामानांतर दखल’ के कारण रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की टीम सौदे को लेकर बातचीत कमजोर पड़ गई. 24 नवंबर, 2015 को यह रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के संज्ञान में लाया गया.

कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि इस डील में सीधे-सीधे उनका ही दखल था. साथ ही उन्होंने इसी ट्विट के जरिए कई सवाल भी उठाए कि मोदी ने फ्रांस के साथ ‘सामानांतर दखल’ क्यों किया?

हालांकि पूर्व रक्षा सचिव मोहन कुमार ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि उन्हें इस संबंध में कुछ भी याद नहीं है.

इससे पहले द हिंदू ने खबर दी थी कि..

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 में फ्रांस कंपनी दसोल्ट एविएशन के साथ कांग्रेस गठबंधन वाली यूपीए सरकार ने 126 एयरक्राफ्ट के लिए समझौता हुआ था, जिसमें प्रत्येक एयरक्राफ्ट की कीमत 79.3 मिलियन यूरो पड़ रही थी. इस डील के मुताबिक, 126 में से 108 एयरक्राफ्ट फ्रांस की मदद से हिंदुस्तान एयरनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इन्हें भारत में बनाकर तैयार करना था.

उसके बाद जब यह डील 2011 में पहुंची तब तक प्रति एयरक्राफ्ट की रेट 100.85 मिलियन यूरो पहुंच गई. उसके बाद 2016 में सरकार ने 2011 में एनडीए सरकार में हुए सौदे से 9 फीसदी डिस्काउंट पाकर फ्रांस की दसोल्ट कंपनी से 36 एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए सौदा किया, जिसके मुताबिक प्रति एयरक्राफ्ट की कीमत 91.75 मिलियन यूरो पड़ रही थी. लेकिन इस सौदे में ‘डिजाइन की डिवलपमेंट’ की वजह से प्रति एयरक्राफ्ट की कीमत 2007 की तुलना में 41.42 फीसदी बढ़ गई. इस हिसाब से प्रति एयरक्राफ्ट की कीम 127.86 मिलियन यूरो पहुंच गई.

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