पाकिस्तान ने जान बूझकर फैलायी है मसूद अज़हर के मरने की खबर ?

ये खबर जितनी सीधी बताई जा रही है उतनी है नहीं. खबर हैं कि जैश-ए-मोहम्मद का सरगना और दुर्दांत आतंकी मसूद अज़हर मारा गया. जी masood azhar is dead. ये खबर जितनी चौकाने वाली है उतनी ही संदिग्ध भी है. पाकिस्तान के कुछ लोग और वहां के मीडिया स्रोत इस खबर को जोर शोर से उड़ा रहे है. लेकिन इस खबर की पुष्टि कोई नहीं कर रहा.

इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तान जानबूझकर मसूद की मौत की खबर उड़ा रहा हो.

ये खबर अगर गलत है तो पाकिस्तान के एक और प्रोपगंडा में हम फंसने जा रहे हैं. जानकारों का कहना है कि मसूद की मौत की खबर फैलाकर पाकिस्तान उसे भारत को सौपने से बच सकता है . इतना ही नहीं हमेशा के लिए मसूद को संरक्षण देने की तोहमत से छुटकारा मिल जाएगा. पाकिस्तान चाहता है कि मसूद अज़हर अपनी पहचान बदलकर भूमिगत हो जाए और अंडरग्राऊंड रहकर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे.

पाकिस्तान पर जिस तरह का दबाव बन रहा है उससे साफ है कि मसूद अज़हर को या तो वो सज़ा दे या फिर अंतर्राष्ट्रीय दबाव झेले. मसूद के न रहने का मतलब ये भी है कि भारत ने जैश के खिलाफ आतंक फैलाने के जितने डोजियर तैयार किए हैं वो सभी अर्थहीन हो जाएंगे. पाकिस्तान आसानी से ये कहकर बच जाएगा कि जो इनसान है ही नहीं उसके खिलाफ केस कैसे चलाएं
मसूद पिछले कई दशकों से भारत को निशाना बनाए हुए है और कश्मीर में आतंक में शामिल है. अगर मसूद नहीं रहता तो पाकिस्तान की धरती से आतंक को बढ़ावा देने के लगभग तीन चौथाई मामले अपने आप खत्म हो जाएंगे.

सूद अज़हर सिर्फ 50 साल का है लेकिन उसे बीमारियां बहुत बुरी हैं. पाकिस्तान के खुफिया विभाग के अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर मीडिया को बता रहे हैं कि वो मारा गया. मसूद का इलाज रावलपिंडी के कंबाइंड मिलिट्री अस्पताल में चल रहा था और पिछले करीब डेढ़ साल से उसका बिस्तर से उठना तक मुश्किल हो गया था. पाकिस्तान के डॉक्टरों ने अजहर को पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी थी. हाल के तनाव के बीच ये भी खबर आई थी कि मसूद अज़हर को मिलिट्री अस्पताल से शिफ्ट कर दिया गया है ताकि उसकी सुरक्षा की जा सके.
भाईयें के बीच बांटा था संगठन

अपनी बिगड़ती हालत के चलते ही इस आतंकी सरगना ने अपने आतंकवादी संगठन को अपने दो भाइयों रऊफ असगर और अतहर इब्राहिम के बीच बांट दिया था. मसूद का भाई रऊफ जम्मू-कश्मीर में कई घटनाओं को अंजाम देने में अपनी भूमिका निभा चुका है, जबकि दूसरा भाई अतहर बलूचिस्तान व अफगानिस्तान में आतंकी वारदातों को अंजाम देता है.

बिस्तर से लगे होने के कारण ही मसूद को पिछले लंबे अर्से से न तो किसी सार्वजनिक स्थल पर देखा गया और न ही व अपने गृह नगर भावलपुर में दिखाई दिया था. बता दें कि मसूद अजहर 2001 में संसद पर हुए हमले, 2005 में अयोध्या हमले और 2016 को पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का जिम्मेदार था.