जस्टिस गोगोई ने पूरे सिस्टम को कसा, वर्किंग डे में जजों को छुट्टी नहीं, सेमिनार भी बंद

लगता है देश की न्याय व्यवस्था अब कुछ बेहतर होने वाली है. तारीख पर तारीख तारीख पर तारीख के खौफ से देश को आज़ादी दिलाने के लिए चीफ जस्टिस ने अदालतों में सख्ती का बीड़ा उठाया है. खबर है कि देश के चीफ जस्टिस ने कार्यकाल शुरू होने के एक हफ्ते के भीतर प्रत्येक हाई कोर्ट के कलीजियम मेंबर्स (चीफ जस्टिस और दो सबसे सीनियर जज) से चर्चा की. विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने लंबित मुकदमों में कमी लाने के लिए कुछ ‘तेज दवाओं’ का परामर्श दिया. ये तेज़ दवाएं ढीली न्याय व्यवस्था का इलाज करने के लिए सोची गई हैं.

जस्टिस गोगोई ने कहा है कि हाई कोर्ट के किसी जज या निचली अदालत के किसी न्यायिक अधिकारी को इमरजेंसी के अलावा कार्य दिवस (वर्किंग डे) में छुट्टी नहीं मिलेगी. इसके साथ ही जस्टिस गोगोई ने जजों से वर्किंग डे पर सेमिनार या आधिकारिक कार्यक्रम से दूर रहने को कहा है. क्योंकि इस वजह से अगले दिन की सुनवाई के दौरान सामने आनेवाले मामलों का वक्त जाया होता है. जस्टिस गोगोई केस फाइलों के प्रति अपने समर्पण के लिए जाने जाते हैं और वह दलीलों के दौरान वकीलों को नई कहानी गढ़ने का मौका देने की बजाए उन पर सीधे तथ्यों की झड़ी लगाते हैं.

सीजेआई गोगोई ने कड़वी डोज की सलाह के तौर पर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को उन जजों को न्यायिक कार्य से हटाने को कहा, जो अदालती कार्यवाही के दौरान नियमित नहीं हैं. उन्होंने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को उन जजों के बारे में जानकारी देने को कहा, जो काम के दौरान अनुशासन की अवहेलना कर रहे हैं. उन्होंने वादा किया कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे जजों से व्यक्तिगत तौर पर रूबरू होगा.

विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद एक आधिकारिक खत के जरिए सीजेआई ने अदालती कार्यदिवस के दौरान जजों के एलटीसी लेने पर भी रोक लगाई है. इसके चलते जजों को अपने पारिवारिक अवकाश को काफी पहले से प्लान करना होगा, साथ ही दूसरे जजों और चीफ जस्टिस के साथ छुट्टियों की उपलब्धता को लेकर सामंजस्य बनाना होगा.

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के जजों को एक साल में तीन एलटीसी मिलती है, वहीं टॉप ब्यूरोक्रेट्स को चार साल के अंतराल में दो बार एलटीसी मिलती है. इससे पहले वर्ष 2013-14 में सीजेआई पी सदाशिवम ने अपने साथी जजों को कोर्ट के कार्यदिवस के दौरान विदेश दौरे न करने की सलाह दी थी.

काम में कड़े अनुशासन की नसीहत के बाद सीजेआई ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ जजों से न्यायपालिका में बड़े पैमाने पर खाली पदों को भरने के लिए फौरन कदम उठाने को कहा है. सीजेआई गोगोई ने जजों से कहा कि निचली अदालतों में केस के तेजी से निपटारे के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जरूरत है. अभी यह निगरानी तिमाही आधार पर होती है. उन्होंने जजों से ट्रायल अदालतों में मामलों के निपटारे के लिए रोजाना निगरानी के मेकनिजम की संभावनाएं तलाशने को कहा. देश की निचली अदालतों में करीब 2.6 करोड़ मामले लंबित हैं.

हाई कोर्ट में लंबित मामलों में कमी लाने के लिए सीजेआई ने मुख्य न्यायाधीशों से ऐसे मुकदमों की फाइलें इकट्ठा करने के बाद ऐसे मामले खंगालने को कहा जो एक समयसीमा के बाद निष्प्रभावी हो गए हैं. सीजेआई ने कहा कि अगला कदम उन आपराधिक मामलों की अपील की पहचान होना चाहिए, जिनमें निचली अदालत से सजा होने के बाद आरोपी जेल में बंद हैं. जो मामले 5 या उससे ज्यादा वर्षों से लंबित हैं, उन्हें सुनवाई के लिए फौरन लिस्ट किया जाए. केस से संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद ऐसे मामलों का निपटारा हो. उन्होंने मुख्य न्यायाधीशों से इस कैटिगरी के मामलों का ब्योरा भेजने को कहा है.

सीजेआई ने इसके साथ ही हाई कोर्ट के कलीजियम को सलाह दी है कि जज की नियुक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ संभावित नाम को चुनें. साथ ही उन्होंने सलाह दी कि मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम हाई कोर्ट जज किसी बाहरी दवाब से प्रभावित हुए बिना जजों का चुनाव करें.

1 टिप्पणी

  1. Chief Justice Of INDIA Ko Mubark Bat detay hai,aur Unkee Sehet Tandrustee Kee Waheguru Say kamna kertay hai..Waheguru Unko Apnay kam may Saflta Bakhshay. Unkay Anay say Insaf ke kiran jagee hai.Jo desh kay Bhavishay ko Ujwal Kregee.

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