कांग्रेस पार्टी में शामिल होंगे हार्दिक पटेल , इस सीट पर मोदी को देंगे चुनौती

गुजरात के नौजवान और लोकप्रिय पाटीदार नेता हार्दिक पटले बहुत जल्‍द कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. खबर है कि कांग्रेस हार्दिक पटेल को जामनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा सकती है. सूत्रों के मुताबिक हार्दिक 12 मार्च को कांग्रेस में शामिल होने का एलान कर सकते हैं. कांग्रेस में शामिल होने की बात पर हार्दिक पटेल ने कहा, मैं राजनीतिक रूप से तैयार हूं, लेकिन अभी मैं इस संबंध में कुछ नहीं कह सकता.

गौरतलब है कि 12 मार्च को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक अहमदाबाद में होने वाली है. इस बैठक में हार्दिक पटेल के भी शामिल होने की खबर है. सूत्रों के अनुसार बैठक के बाद पार्टी के शीर्ष नेता वहां एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे और हार्दिक पटेल को कांग्रेस में शामिल किया जाएगा.

गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्‍य है. इसी कारण कांग्रेस अपनी पूरी ताकत गुजरात में लगाना चाहती है. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्‍कर दी थी. यही कारण है कि लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस इसका फायदा उठाना चाहती है.

हार्दिक पटेल गुजरात में पटेल समुदाय द्वारा ओबीसी दर्जे की मांग को लेकर जारी आरक्षण आंदोलन के युवा नेता हैं. ओबीसी दर्जे में पटेल समुदाय को जोड़कर सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण चाहते हैं.

हार्दिक पटेल गुजरात के कड़ी तालुका के भाजपा कार्यकर्ता भरतभाई पटेल के बेटे हैं. उन्होंने तीन साल पहले अहमदाबाद के सहजानंद कॉलेज से स्नातक किया है.

गुजरात में आबादी का पांचवां हिस्सा पटेल समुदाय का है. पटेल समुदाय आरक्षण और ओबीसी दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर पिछले कई सालों से आंदोलन कर रहा है.

इस आंदोलन की कमान अब नई पीढ़ी के हार्दिक पटेल की हाथों में है. कॉमर्स छात्र हार्दिक पटेल ठान चुके हैं कि वे गुजरात में ओबीसी का दर्जा दिए जाने के मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे.

इसके बाद उन्होंने गुजरात में आंदोलन छेड़ दिया. उनकी अगुआई में पिछले 40 दिनों से गुजरात में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन चल रहा है. हार्दिक पटेल के कंधे से कंधा मिलाते हुए इस संघर्ष में 10 लाख से भी अधिक लोग सड़कों पर उतर चुके हैं.

उनके तेवर और मक़सद के आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दबाव में दिखाई दे रहे हैं. इस आंदोलन ने मोदी के विकास मॉडल की हवा निकाल दी है. हार्दिक पटेल की अगुआई में चल रहा ये आंदोलन वही आंदोलन है जिसके आगे आज से 30 साल पहले गुजरात की तत्कालीन सरकार को घुटने टेकने पड़े थे.

फरवरी 1985 के विधानसभा चुनाव में 148 सीटों के बहुमत के बावजूद पटेल समुदाय के सड़क पर उतर आने के कारण मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

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