दिल्ली में कांग्रेस गठबंधन को मजबूर, केजरीवाल का दांव चल गया ?

सभी की ओर से ना होने के बावजूद दिल्ली में इस बात के आसार पूरे आसार हैं कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर ही कांग्रेस पार्टी चुनाव करेगी. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने पीसी चाको को बाकायदा इस बात का पता लगाने की जिम्मेदारी सौपी है कि दिल्ली में गठबंधन हो सकता है तो पता लगाया जाए.

मामला इतना गंभीर है कि खुद पीसी चाको ने दिल्ली के हज़ारों पार्टी कार्यकर्ताओं को फोन करके इस बारे में उनकी राय मांगी है. ये तब है जब खुद दिल्ली की अध्यक्ष शीला दीक्षित गठबंधन के लिए साफ इनकार कर चुकी हैं. हालात ये हैं कि शीला दीक्षित गुस्से से तिलमिला रही हैं और पार्टी उनकी परवाह के बगैर सर्वे कर रही है. हज़ारों कार्यकर्ताओं को बाकायदा फोन करके ये राय मांगी जा रही है. खुद शीला दीक्षित ने आजतक को बताया कि उन्हें किसी सर्वे के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि ये चिंता का विषय है. कम से कम ऐसा सर्वे करने से पहले हमसे पूछा तो जाना चाहिए था. मैं दिल्ली की प्रदेश अध्यक्ष हूं.

मामला सिर्फ दिल्ली और केन्द्रीय नेतृत्व के बीच का नहीं है हालात ये है कि दिल्ली में गठबंधन न होने के कारण देश भर में कांग्रेस पर सवाल उठ रहे हैं. केजरीवाल बार बार बीजेपी को दूर रखने के लिए तालमेल बढाने पर आमादा है. वो संदेश दे रहे हैं कि अल्पसंख्यक और दलितों के वे अकेले हितैषी हैं और आत्म सम्मान से ज्यादा प्राथमिकता बीजेपी को दूर रखने को दे रहे हैं.

चूंकि विपक्षी एकता ही मोदी सरकार की सत्ता से वापसी की शर्त है इसलिए पूरे देश में महागठबंधन की बात हो रही है. सभी पार्टियां दबाव बना रही हैं कि दिल्ली में कांग्रेस तालमेल करे. दिल्ली में गठबंधन होगा तो पूरे देश में संदेश जाएगा.

इसी दुविधा के कारण कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं की राय मांगने का अभियान शुरू किया है. माना जा रहा है कि राज्य इकाई को दबाव में लेने के लिए ये सर्वे किया जा रहा है. इस बहाने गठबंधन को आखिरी आकार देने की कोशिश हो रही है. लेकिन इतना साफ है कि कांग्रेस ने इनकार के बाद ये सर्वे किया है. ऐसी हालत में साफ है कि पार्टी गठबंधन के लिए एक कदम आगे बढ़ गई है. सीधी भाषा में कहें तो ये गठबंधन होना पक्का है.