ये दस चिरकुट देश को हिलाने वाले थे, पढ़िए NIA की कॉमेडी कहानी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को 10 चिरकुटों को गिरफ्तार किया है. दावा है कि ये चार चिरकुट आईएसआईएस से प्रेरित होकर एक संदिग्ध आतंकी गठन बना चुके थे. एनआईए का दावा है कि गिरफ्तार किए गए ये चिरकुट राजनीतिक हस्तियों और दिल्ली तथा उत्तर भारत में सरकारी प्रतिष्ठानों और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर हमले करने वाले थे.

एनआईए ने आरोप लगाया है कि समूह में 20-35 आयु वर्ग के लोग हैं सब छोटे से परिवारों से आते हैं. कहा जा रहा है कि अमरोहा के एक मुफ्ती ने उन्हें कट्टरपंथ की ओर उकसाया है. आगे आप पढ़ेंगे कि मुफ्ती के भड़काने भर से इन चिरकुटों के पास टैक्नोलॉजी और युद्द कला की कितनी जबरदस्त क्षमता आ गई. अब बताते हैं इन चिरकुटों के बारे में .

1. मुफ्ती मोहम्मद सुहैल उर्फ हजरत (29): इसे आतंकवादी समूह का स्थापक बताया गया है वह हकीम महताबउद्दीन हाशमी रोड स्थित एक मदरसे में मुफ्ती है. इसका घर उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में है. मुफ्ती ने तीन-चार महीने में इस आतंकी संगठन की स्थापना की और इतना खतरनाक बना दिया कि एनआईए तक इसकी खबर पहुंच गई. एनआईए को एक वीडियो मिला जिसमें सुहैल बता रहा है कि सर्किट का उपयोग कर कैसे बम तैयार किया जा सकता है. आरोप है कि सुहैल ने टीम के अन्य सदस्यों को हथियार, विस्फोटक और अन्य सामान खरीदने का जिम्मा सौंपा था ताकि रिमोट से नियंत्रित बम और पाइप-बम तैयार किया जा सके. मुफ्ती का विस्फोटक ज्ञान देखिए बड़े से बड़ा टेक्नोक्रेट शरमा जाए. एनआईए ने ये नहीं बताया कि इस मुफ्ती के बाद ये ज्ञान आया कहां से.

2. अनस यूनुस (24): वह जाफराबाद का रहने वाला है और नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग का छात्र है. उसने आतंकी साजिश के तहत बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे बिजली के उपकरण, अलार्म घड़ियां, बैटरी आदि की खरीद की. सिविल इंजीनियर लेकिन काम इलैक्ट्रानिक इंजीनियर का पूरी दक्षता से.

3. राशिद जफर रका उर्फ जफर (23): वह भी जाफराबाद का रहने वाला है. वह कपड़ों का कारोबार करता है तथा समूह का हिस्सा था. कपड़े बेचते बेचते वो खौफनाक आकंतवादी कैसे बन गया पता नहीं चला है.

4. सईद (28): वह अमरोहा के सैदापुर इम्मा का निवासी है और अमरोहा में वेल्डिंग की दुकान चलाता है जहां कुछ पिस्तौल और रॉकेट लॉन्चर तैयार किए गए थे. वेल्डर को रॉकेट लांचर बनाने की महान तकनीकी विद्या हासिल थी. कहां से आई उसे खुद नहीं पता. और इतना चिरकुट शख्स रॉकेट बना रहा था तो खबर एनआईए तक कैसे पहुंची. जबकि खुद एनआईए मान रहा है कि ये कोई अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन वाला गिरोह नहीं था

5. सईद का भाई रईस अहमद: वह सैदापुर इम्मा, अमरोहा का रहने वाला है. अमरोहा के ईदगाह के पास इस्लाम नगर में उसकी वेल्डिंग की दुकान है. दोनों भाइयों ने कथित रूप से आईईडी और पाइप बम तैयार करने के लिए 25 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री आदि खरीदी थी. उसने आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए एक रॉकेट लॉन्चर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. सोचिए एक चिरकुच नेशनल लेवल का आतंकवादी वेल्डिंग करते करते बन गया.

6. जुबैर मलिक (20): जाफराबाद निवासी है और दिल्ली के एक विश्वविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष का छात्र है. ठीक से मूंछ नहीं आई है लेकिन इरादे बेहद खौफनाक.

7. जुबैर का भाई जावेद (22): जाफराबाद का ही रहने वाला है और दोनों भाई आतंकवादी साजिश का हिस्सा थे. दोनों ने फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड (135 बरामद), बैटरी, कनेक्टर और बम बनाने की सामग्री खरीदी. दोनों ने पैसे की व्यवस्था करने के लिए परिवार का सोना कथित तौर पर चुरा लिया. आतंकवादी घटना में 135 सिम कार्ड का क्या इस्तेमाल.

8. साकिब इफ्तेकार (26): हापुड़, उत्तर प्रदेश का निवासी है और जामा मस्जिद, बक्सर, उत्तर प्रदेश में इमाम का काम करता है. उसने हथियारों की खरीद में मोहम्मद सुहैल की मदद की. एजेंसी ने तलाशी के दौरान 12 पिस्तौलें, 150 कारतूस, चाकू और तलवारें बरामद की है. जब गैंग में ही जबरदस्त टैक्नोक्रेट मौजूद थे और रॉकेट लांचर तक का निर्माण कर सकते थे तो हथियार खरीदने के लिए इमाम की जरूरत कैसे पड़ी.

9. मोहम्मद इरशाद (25 से 30 साल के बीच): अमरोहा के मोहल्ला का निवासी है और ऑटो-रिक्शा चालक है. उसने आईईडी और बम बनाने के लिए सामग्री रखने के लिए ठिकाने की व्यवस्था करने में मोहम्मद सुहैल की मदद की. है ना बड़े वाले चिरकुट. हथियार के लिए बारूद बना रहा था वेल्डर, बारूद खरीद रहा था उसका भाई. लेकिन लोह खरीदने के लिए उसने दिल्ली से दूर अमरोहा के एक चिरकुट को चुना. दिल्ली में बम बनाकर वो अमरोहा में छिपाने जाने वाला था. वो भी ऑटो वाले की मदद से.

10. मोहम्मद आजम (35): दिल्ली के चौहान बाजार का निवासी है सीलमपुर में दवाइयों की एक दुकान चलाता है. उसने सुहैल को हथियारों की व्यवस्था करने में मदद की. अब जब हथियार का सामान खरीदने. हथियार बनाने और हथियार का बारूद बनाने का काम एक ही घर के दो भाई कर रहे थे. लोहा खरीदने का काम भी कोई तीसरा शख्स कर रहा था तो इनको गैंग में क्यों भरती किया था.

खैर एनआईए की हैसियत कोर्ट के सामने एक आरोप लगाने वाले की ही रहने वाली है. अदालत तय करेगी कि इस कहानी में कितना दम है लेकिन 2019 के चुनाव के लिए ये गिरफ्तारी एक राजनीतिक मुहावरे की काट बनेंगी. अबतक देश में आतंकवादी नहीं पाये जाते थे. पाकिस्तान को आतंकवादी भेजने पड़ते थे. अब इन चिरकुटों की वजह से चुनाव में देश के मुसलमानों पर उंगली उठाने का इंतजाम हो गया है. राष्ट्रवाद की राजनीति को भी खाद पानी मिलेगा.