जानिए बीजेपी से किस किस के कट सकत हैं टिकिट

बॉर्डर पर तनाव से चुनावी लाभ की उम्मीद के बावजूद बीजेपी कोई कसर नहीं छोड़नी चाहती है. पार्टी सूत्रों को मानें तो बीजपी अपने करीब एक तिहाई वर्तमान सांसदों को टिकट काटने की तैयारी कर रही है. पार्टी चाहती है कि कुछ स्टार चेहरों को जगह दी जाए और जिन सीटों पर कामकाज के आधार पर वोट मिलने की संभावना कम है. वहां कोई चमकता चेहरा मैदान में उतार दिया जाए.

नए बदलाव के लिए पार्टी नमो एप का सहारा ले रही है. उम्मीदवारों को कहा जा रहा है कि नमो ऐप से मिले फीडबैक के आधार पर उन्हें टिकट नहीं मिला है. ये ऐसा तरीका है जिसकी तस्दीक नहीं हो सकती. नमो ऐप का डेटा सिर्फ पार्टी के पास है. और पार्टी के आईटी ऑपरेशन खुद अमित शाह देखते हैं.

सूत्रों के मुताबिक पार्टी को हाल के सालों में चेहरे बदलने से बड़ा लाभ हुआ है. गुजरात और दिल्ली में नगर निगम चुनावों में पार्टी ने हर सिटिंग पार्षद का टिकट काट दिया था. नतीजा ये हुआ कि करप्शन में गले तक डूबी नगर निगम में चेहरा बदलने से पार्टी को एंटी इनकंबेंसी से राहत मिली. और दोनों ही जगह पार्टी फिर से सत्ता में आ गई.

हाल के चार राज्यों को चुनाव में भी पार्टी ने बड़ी संख्या में नये चेहरों को जगह दी. पार्टी का मानना है कि पांच साल के खराब कामकाज का गुस्सा चेहरा बदलने से कम किया जा सकता है.

खबर है कि पार्टी वाटर टेस्ट या कहें कि परीक्षण के तौर पर इस बदलाव को दिल्ली से शुरू करने वाली है . नई दिल्ली सीट पर बीजेपी जानी मानी वकील मीनाक्षी लेखी का टिकट काटकर क्रिकेटर गौतम गंभीर को चुनाव लड़ाने वाली पर विचार कर रही है या कहें कि वो उनका नाम उछालकर ये जानना चाहती है कि इससे लाभ होगा या नहीं. नई दिल्ली इलाके में ज्यादातर केन्द्र सरकार के कर्मचारी रहते हैं और मीनाक्षी लेखी अब तक कोई ज्यादा गंभीर छाप नहीं छोड़ सकी हैं.

इसी तरह दक्षिणी दिल्ली के सांसद उदित राज को भी पार्टी बदल सकती है . इस सीट पर कोई नाम सामने नहीं लाया गया है. लेकिन ये पक्का है कि इस खबर के जरिये पार्टी उदितराज के स्थान पर कोई और उम्मीदवार जीतेगा या नहीं ये पता लगा लेगी. उदित राज आज़ाद खयाल सांसद हैं. समय समय पर उन्होंने सरकार से अलग अपनी राय रखी है. उनका अपना संगठन है. और कभी वो रामविलास पासवान और मायावती से भी बड़ी रैलियों का आयोजन करके दलित नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं

ईस्ट दिल्ली सीट पर अभी महेश गिरि सांसद हैं. खबर है कि पार्टी उन्हें इस बार पूर्व सांसद बना देगी. महेश गिरी की जगह हर्ष वर्धन को चेहरा बनाया जाएगा. समझ सकते हैं कि हर्षवर्धन का इस इलाके में अच्छा खासा प्रभाव है. हर्षवर्धन चांदनी चौक के सांसद हैं.

चांदनी चौक सीट पर केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन सांसद है. जाहिर बात है कि इस सीट पर ऐसा कोई धमाकेदार काम नहीं हुआ कि लोग हर्ष वर्धन को दुबारा चुन लें. दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी की विधायक अल्का लांबा इसी इलाके से आती हैं और उनकी छवि तेज़ तर्रार नेता की है. इस सीट पर दावेदारी  या तो पूर्व सांसद विजय गोयल की हो सकती है या फिर पार्टी किसी बाहरी चेहरे को जगह दे सकती है. हर्षवर्धन को काफी सीनियर नेता होने के नाते घर नहीं बैठाया जाएगा और उन्हें ईस्ट दिल्ली से लड़ाने का प्लान है.

बीजेपी अध्यक्ष होने के कारण मनोज तिवारी को नॉर्थ ईस्ट सीट से अभी डिस्टर्ब नहीं किया जाएगा. सांसद रमेश विधूड़ी और प्रवेश वर्मा का भीअपना निजी प्रभाव है इसलिए पार्टी उन्हें बदलने का जोखिम नहीं ले सकती .

नई दिल्ली के विश्लेषण से साफ है कि आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी हर उस चेहरे का टिकट काटने वाली है जिसकी अपनी पकड़ नहीं है या जो खुद चुनाव न जीतकर पार्टी के भरोसे है.

जाहिर बात है नमो एप का बहाना बेहतर अस्त्र है ही. सांसदों को बार बार बदलने एक फायदा पीएम पद के उम्मीदवार की अहमियत के तौर पर भी होता है. जब सासंद मजबूत नहीं होते और स्वतंत्र राय नहीं रखते तो प्रधानमंत्री की ताकत बढ़ जाती है अगले चुनाव में आप और मजबूती से उभरते हैं जो लोग मानते है कि अल्पमत की सरकार होने की हालत में नितिन गडकरी या कोई और पीएम पद के दावेदार को तौर पर उभरेगा उन्हें इस गणित को भी समझना चाहिए. कमजोर सांस अपनी राय रखने की हालत में नहीं होंगे. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह है और मोदी के नाम के अलावा वो किसी और के लिए सांसदों को तैयार होने ही नहीं देंगे भले ही पार्टी की सरकार बने या न बने.

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