पाकिस्तान नहीं मोदी का ये दोस्त देता है आतंकियों को सबसे ज्यादा पैसे

आप मानें या न मानें लेकिन दुनिया में सबसे ज्यादा आतंकवादियों को कोई पैसे देता है तो वो कोई और नहीं पीएम मोदी के दोस्त का देश है. मोदी के दोस्त मतलब वो राष्ट्र प्रमुख जो पिछले दिनों भारत की यात्रा पर आए थे तो मोदी प्रोटोकोल तोड़कर उनसे मिलने एयरपोर्ट तक गए. ये दोस्त हैं साऊदी अरब के प्रिंस

न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर 9/11 के हमले के बाद पहली बार साल 2001 में अमेरिका ने आतंकी संगठनों के पैसों पर लगाम लगाने के लिए अभियान छेड़ा था, लेकिन 19 साल बाद की स्थिति यह है कि अमेरिकी मिशन या संयुक्त राष्ट्र की ओर से हुए कई प्रयासों के बावजूद आतंकियों को मिलने वाले पैसों में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि स्थिति पहले से ज्यादा खराब है. तमाम प्रतिबंधों के बावजूद 1990 के दशक की तुलना में आज आतंकी संगठनों की संख्या और ताकत दोनों ही बढ़ी है.

इन संगठनों की संपत्ति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक साल 2011 में शुरुआती अमेरिकी कार्रवाई में महज 1400 बैंक खातों से आतंकियों के 140 मिलियन यूएस डॉलर जब्त किए गए थे, जबकि इस्लामिक स्टेट (ISIS) की संपत्ति 1.7 बिलियन डॉलर बताई जाती है. हम यहां आतंकी संगठनों को मिलने वाले पैसों और उनकी फंड‌िंग के स्रोतों का जिक्र कर रहे हैं.

कौन-कौन देता है आतंकी संगठनों को पैसा

चैरिटीः आतंकी संगठनों को मिलने वाले पैसों में सबसे बड़ा हिस्सा चैरिटी यानी अनुदान का होता है. इनमें भी सबसे अहम भूमिका किसी खास शख्सियत की ओर से दिया जाना वाला दान होता है. अर्से तक कुछ खास शख्स और सउदी अरब आतंकी संगठनों के फंडिंग के प्रमुख स्रोत हुआ करते थे. 9/11 की घटना में आतंकी संगठन अलकायदा द्वारा खर्च हुए पैसों में सबसे ज्यादा पैसा सऊदी अरब के लोगों ने बतौर चैरिटी दिया था.

साल 2004 में आतंकियों फंडिंग के खिलाफ काम करने वाली स्‍पेशल टास्क फोर्स ने रिपोर्ट में कहा था सऊदी अरब ने भले ही साल 2002 में अल-कायदा समेत दूसरे संगठनों को फंडिंग करने वालों पर कार्रवाई की बात की हो. पर अभी भी इस देश से आतं‌कियों को पैसे ‌दिए जा रहे हैं.

गैर-कनूनी धंधेः टेरेरिस्ट फाइनेंस की गहरी समझ रखने वाली इतालवी पत्रकार लॉरेटा नेपॉलियोनी ने अपने एक लेख में कहा था, “आतंकियों की आय का प्रमुख जरिया अफीम व दूसरे ड्रग्स की खरीद-बेच से होती है.” उन्होंने अपनी एक किताब में भी कई आतंकी वारदातों में लगे पैसों का उल्लेख करते हुए बताया कि ज्यादातर के पीछे अवैध ड्रग्स से मिले पैसे ही है.

अफीम की खेतीः संयुक्त राष्ट्र ने आतंकियों के पैसों स्रोत पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसके अनुसार अफीम की खेती पर अफगानिस्तान का एकाधिकार है और उसमें करीब 90 फीसदी हिस्से पर आतंकी संगठनों का कब्जा है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक करीब 65 अरब डॉलर (लगभग तीन हजार अरब रुपए) आतंकी संगठनों को मिलते हैं. इनमें अफीम की खेती और उसका व्यापार प्रमुख साधन है. अहम बात यह है कि इनके खरीदार कमोबेस दुनिया के हर कोने में मौजूद हैं. इनमें कई बहुत ज्यादा पैसे वाले भी शामिल हैं.

नशीली दवाओं और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र के ऑफिस (यूएनओडीसी) ने एक रिपोर्ट में कहा था, अफगानिस्तान से अफीम बेचने का कारोबार पाकिस्तान, मध्य एशिया और ईरान के रास्ते दुनियाभर में फैलते हैं.

वैध धंधेः साल 2001 में आतंकी संगठनों पर अमेरिका की ओर से कार्रवाई किए जाने के बाद कुछ आतंकी सगठनों ने कई वैध तरीकों से पैसे निकालने शुरू किए. जैसे कि खेती, सार्वजनिक निर्माण क्षेत्र में निवेश और आमदनी शुरू कर दी. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार मीडिल ईस्ट और पाकिस्तान के कई रीटेल शहद की दुकानों का मालिक ओसामा बिल लादेन था. इतना ही हथ‌ियारों की खरीद-फरोख्त व बाद के दिनों में कई देशों के सिनेमा और क्रिकेट सट्टों में भी आतंकी पैसे डालने लगे. इससे भी उन्होंने जमकर मुनाफा कमाया. भारत में भी ऐसे कई वारदात सामने आ चुके हैं.

नये तरीकेः बीते कुछ सालों में आतंकियों ने पैसे जुटाने के लिए ऑनलाइन सुविधाओं का जमकर इस्तेमाल किया है. फाइनेंशियल एक्‍शन टास्क फोर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार इन दिनों साइबर जिहादी पैदा करने में आतंकी संगठनों ने जोर लगाया है. ये ऑनलाइन गतिविधियों से अपने संगठन के लिए पैसे उगाहते हैं. इसके कई तरीके है. ऑनलाइन फ्रॉड की कई घटनाएं आतंकी गतिविध‌ियों से होती हैं.

क्यों चैरिटी का आतंकी संगठनों के फंडिंग में है बड़ी भूमिका

कोई भी आतंकी संगठन खुद को कभी आतंकी संगठन नहीं कहता. ना ही वह दहशत का कारोबारी होने स्वीकारता है. आमतौर पर आतंकी संगठन अपना उद्देश्य इस्लाम की रक्षा, दुनिया में इस्लाम का विस्तार, इस्लामी कौम की बदहाली का उत्‍थान, जिहाद, मस्जिदों की रक्षा आदि बताते हैं. ऐसे में कोई भी ऐसा शख्स या किसी भी रूप में इन संगठनों के नजररिए को समझने जाता है तो वे इनके मोहपास में फंस जाता है.

वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक पढ़ा-लिखा पैसे वाला इस्लामी तबका भी आतंकी संगठनों को पैसा मुहैय्या कराता है. दुनिया में बहुत से लोग आतंकी संगठनों को इस्लामी मसीहा और जिहादी संगठन मानते हैं.

हाल ही में भारत सरकार ने जमात-ए-इस्लामी नाम के अलगवादी संगठन की संपत्ति जब्त करनी शुरू की. इसमें नया खुलासा हुआ. इस संगठन ने ज्यादातर पैसा मस्जिद निर्माण, मदरसों और स्कूलों में लगा रखा है. इन वैध धंधों से ही वे आतंकियों को सम‌र्थन के लिए पैसे जुटाते थे. ऐसे में चैरिटी के जरिए मिलने वाले पैसे आतं‌कियों के खजाने में ज्यादा वृद्ध‌ि करते हैं.

आतंकी संगठनों को पैसे कैसे ट्रांसफर किए जाते हैं

इंग्लैड की यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के सीनियर लेक्चरर बिल टपमैन आतंकी फंडिंग पर लिखी अपनी किताब में कहते हैं कि आतंकी सीधे एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने के बजाए एक दूसरे को पूरी कंपनी अधिकार ही बेच देते हैं. आमतौर पर एक कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी की खरीद में कागजरी कार्रवाई इतना पेंचीदा और गहन होती है कि इसे अवैध साबित करने में सालों लगते हैं.

COURTSEY- NEWS 18