जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध के खिलाफ क्यों हैं AMU के छात्र

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन छात्रों जम्मू कश्मीर के जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध के खिलाफ है. संगठन ने इस बैन पर पुनर्विचार की मांग की है. छात्रसंघ अध्यक्ष एम सलमान इम्तियाज की ओर से सोमवार को जारी बयान में कहा गया है कि इस ‘सामाजिक-धार्मिक-राजनीतिक’ संगठन पर लगा प्रतिबंध एक ‘झटके’ सरीखा है.

बयान में कहा गया, ‘जमात न तो अंडरग्राउंड संगठन और न ही आतंकी संगठन. यह राज्य के के चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है. 1989 में चुनाव में बड़े पैमाने पर हुई धांधलियों के बाद जमात ने चुनावी प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया.’

छात्रसंघ अध्यक्ष के बयान में बीजेपी पर ‘हिंदुत्व की राजनीति’ करने का भी आरोप लगाया गया है. कहा गया है, ‘बीजेपी का शासन खत्म ही होने वाला है और चुनाव के लिए अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं, ऐसे में जमात पर बैन का फैसले का गैरकानूनी गतिविधियों से कोई सबंध नहीं है. यह कट्टर हिंदुत्व की राजनीति से जुड़ा हुआ है.

कश्मीर में धार्मिक नेतृत्व, सिविल सोसायटी से लेकर व्यापारियों तक ने इस प्रतिबंध को राजनीति से प्रेरित बताया है.’ एएमयू छात्रसंघ ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह जमात पर लगाए प्रतिबंध की वजह से लग रहे आरोपों पर सफाई दे.

वहीं, द इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर बातचीत में इम्तियाज ने कहा कि सरकार को बैन का मूल्यांकन करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘संकट काल में जमात की निभाई गई भूमिका पर सरकार को विचार करना चाहिए. 2014 में कश्मीर में आई बाढ़ के वक्त, संगठन ने मदद करने की दिशा में शानदार काम किया.

संगठन ने राज्य में 2005 में आई बाढ़ के दौरान भी शानदार काम किया. यह संगठन डेमोक्रेसी में भरोसा करता है और उसने साफ किया है कि उसका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है. हमें कश्मीर के लिए कठोर नहीं, एक समावेशी नीति की आवश्कयता है.’

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