अटल विहारी वाजपेयी एम्स में भर्ती, जानिए कैसी है आजकल तबियत

अटल विहारी वाजपेयी एम्स में भर्ती, जानिए कैसी है आजकल तबियत

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को आज नियमित जाँच के लिए एम्स में भर्ती कराया गया है. वह एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया की निगरानी में हैं. भाजपा की ओर से आज एक बयान जारी कर यह जानकारी दी गयी है.

बयान में कहा गया है कि डॉक्टरों की सलाह पर पूर्व प्रधानमंत्री को एम्स में भर्ती कराया गया है. पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी पिछले काफी दिनों से अस्वस्थ हैं और अपने सरकारी आवास पर ही डॉक्टरों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद वाजपेयी को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

हाल ही में बीबीसी की संवाददाता सरोज सिंह ने वाजपेयी के दोस्त से बात की थी. सरोज की रिपोर्ट के मुताबिक अटल जी अब न स्वस्थ हैं, न अस्वस्थ हैं, वृद्धावस्था की बीमारी से ग्रस्त हैं. वे अब बहुत कम बोलते हैं लेकिन चेहरे से, हावभाव से, आंखों से पता लग जाता है कि उन्होंने पहचान लिया. पढ़ाई लिखाई की स्थिति में नहीं हैं. न कुछ लिखते हैं, न पढ़ते हैं लेकिन टीवी बहुत देखते हैं. पुरानी फ़िल्में और पुराने गाने उन्हें बहुत पसंद है, वही देखते रहते हैं. उससे उन्हें प्रसन्नता होती है. हर रोज़ चार फ़िज़ियोथेरेपिस्ट आते हैं डॉक्टरों का एक दल चौबीस घंटे उनकी सेहत की देखभाल करता है.

सुबह उठते हैं, नित्यकर्म के बाद एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट उनकी थेरेपी करता है. फिर वो नाश्ते में चाय-बिस्कुट लेते हैं. ठोस खाना उन्हें अभी नहीं पचता तो लिक्विड डाइट लेते हैं. इसके बाद दोपहर तक डॉक्टरों के साथ समय बीतता है. फिर लंच करते हैं.

अटल जी को खिचड़ी बहुत पसंद है क्योंकि यह जल्दी बन जाती है और सुपाच्य है. एक बार मैं उनके साथ यूएनओ में गया था, वहां मैंने उनके लिए खिचड़ी बनाई. मुझे खिचड़ी बनाना भी उन्होंने ही सिखाया था. पूरे दिन में चार फ़िज़ियोथेरेपिस्ट आते हैं, दो सुबह, दो शाम.

उन्हें अब चलने में बहुत दिक्कत होती है. सहारे से चलते हैं लेकिन ज़्यादातर बैठे रहते हैं. बात बहुत कम करते हैं. वाजपेयी ने ऐसे जीता था घाटी के लोगों का दिल.

जन्मदिन कैसे मनाते हैं वाजपेयी?

जन्मदिन की सुबह अटल जी पहले पूजा करते हैं और सबमें प्रसाद बांटते हैं. यह नियम आज भी पूरा किया जाता है.

उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले हम उनका जन्मदिन छुपकर मनाते थे क्योंकि वो ज़्यादा कुछ करते नहीं थे. लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका जन्मदिन सार्वजनिक रूप से मनाया जाने लगा.

उनमें हमेशा एक ख़ासियत यह रही कि अगर उन्होंने एक बार किसी सभा या कार्यक्रम का न्योता स्वीकार कर लिया तो वो जाते ज़रूर थे. चाहे वो अस्वस्थ हों, चाहे जाने का कोई साधन न मिले लेकिन वो पहुंचते ज़रूर और कार्यक्रम पूरा होने पर ही आते.

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