साक्षी को तो नोटिस मिल गया लेकिन मीडिया को माफी क्यों? साक्षी से ज्यादा तो मीडिया ने आग लगाई

मेरठ: चुनाव नज़दीक आते ही बीजेपी के नेता विवादास्पद बयान देने शुरू कर देते हैं और उसके बाद उस पर बवाल शुरू हो जाता है आखिर में पार्टी इन नेताओं की हरकतों से पल्ला झाड़ लेती है. पार्टी का काम भी हो जाता है. ध्रुवीकरण भी हो जाता है. सांप्रदायिक सोच के लोग भी पार्टी के साथ हो जाते हैं और पार्टी पर असर भी नहीं पड़ता लेकिन सबसे ज्यादा इस मामले में जिसकी भूमिका पर आपत्ति होनी चाहिए वो आराम से निकल लेता है. वो है मीडिया.

अगर साक्षी महाराज ने सांप्रदायिकता फैलाने वाला बयान दिया तो वो 200-400 लोगों ने सुना लेकिन उस विवादास्पद बयान को करोड़ों लोगों को बार-बार कई दिन तक सुनाने वाला तो मीडिया था.

  1. अगर इस बयान से सांप्रदायिकता बढ़ती है तो इसे मीडिया ने क्यों फैलाया?
  2. क्या मीडिया ने सुनियोजित तरीके से साक्षी महाराज का बयान दिखाया ताकि चुनाव से पहले तनाव वाला वातावरण बन सके?
  3. क्या मीडिया सांप्रदायिकता फैलाने की साजिश का हिस्सा है?
  4. मीडिया को अच्छे बुरे की तमीज कम हो गई है?
  5. क्या मीडिया में संघ और आरएसएस को लोग घुस गए हैं?
  6. क्या चुनाव से पहले सांप्रदायिकता फैलाने की साजिश में मीडिया भी साजिश है?

अफसोस की बात ये है कि एक भड़काऊ और आपत्तिजनक संवाद कुछ सौ लोगों के बीच करने वाले साक्षी महाराज पर तो एफआईआर हो गई लेकिन उसी संवाद के ज़रिए पूरे समाज़ में विभेद का भाव घोलने वाले मीडिया को एक नोटिस तक नहीं!

साक्षी महाराज के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 298 के तहत मेरठ में यह केस दर्ज किया गया है. Knockingews.com ने साक्षी महाराज के इस आपत्तिजनक बयान की एक लाइन नहीं छापी क्योंकि हम इस तरह की पत्रकारिता के दुष्परिणाम जानते हैं लेकिन चुनाव आयोग और सरकार ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करेंगे तो दूसरे तीसरे और चौथे साक्षी महाराज और ओवैसी चुनावी फायदे के लिए माहौल खराब करते रहेंगे.

शुक्रवार को वेस्ट एंड रोड स्थित श्री शनि शक्तिपीठ बालाजी हनुमान मंदिर की ओर से आयोजित संत समागम में भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने ये बयान दिया था. यहां पहले से ही मीडिया मौजूद था. उसने बयान को बार बार रिपीट किया.

सवाल इस बात का है कि साक्षी महाराज को बीजेपी अपना प्रतिनिधि मानने से इनकार कर रही है. खुद साक्खी भी कहते हैं कि वो सरकार के प्रतिनिधि नहिं है. फिर साक्षी के बयान को मीडिया में अहमियत देने की क्या नीयत हो सकती है.

साक्षी एक तरफ भड़काऊ बयान दे रहे थे दूसरी तरफ मोदी की तारीफों के पुल भी बांध रहे थे. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने ही पाकिस्तान, म्यांमार में घुसकर दुश्मनों को सबक सिखाया और सेना का मनोबल बढ़ाया.पीएम तो दुबई में भी मंदिर के लिए जमीन मांग लेते हैं.

साक्षी महाराज ने कहा कि भाजपा जो भी कुछ है वह संत और महात्माओं की कृपा से है. साक्षी ने कहा कि मैं धर्म नीति के लिए राजनीति में हूं.

बस थोड़ा इंतज़ार..

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