1971 की लड़ाई में भागे नहीं थे राजीव लेकिन थे कहां? BBC का सच यहां पढ़ें

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बारे में सोशल मीडिया पर एक भ्रामक संदेश सर्कुलेट किया जा रहा है कि ‘जब 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग में देश को उनकी सेवाओं की ज़रूरत थी तो भारतीय वायु सेना के नियमित पायलट रहे राजीव गांधी देश छोड़कर भाग गए थे’.

रिवर्स सर्च से पता चलता है कि पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान जब भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन को दो दिन की हिरासत के बाद पाकिस्तान ने रिहा किया, उसके बाद ये मैसेज तेज़ी से सोशल मीडिया पर शेयर होना शुरू हुआ.

बीजेपी समर्थक फ़ेसबुक और व्हॉट्सऐप ग्रुप्स में इस वायरल संदेश के साथ लिखा जा रहा है कि “जो राहुल गांधी आज भारत की एयर-स्ट्राइक के सबूत मांग रहे हैं, उनके पिता देश के मुश्किल वक़्त में देश के साथ खड़े नहीं हुए थे.”

अपने इन दावों को सही साबित करने के लिए कुछ फ़ेसबुक और ट्विटर यूज़र्स ने ‘पोस्टकार्ड न्यूज़’ और ‘पीका पोस्ट’ नाम की दो वेबसाइट्स के लिंक शेयर किये हैं. इन वेबसाइट्स ने साल 2015 और 2018 में बिल्कुल वही दावा किया था जो हिन्दी में लिखी वायरल पोस्ट में किया गया है.

बीबीसी के बहुत सारे पाठकों ने भी फ़ैक्ट चेक टीम के व्हॉट्सऐप नंबर पर इस पोस्ट को भेजा है और इसकी हक़ीक़त जाननी चाही है

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म्स पर सैकड़ों बार शेयर की जा चुकी इस पोस्ट को अपनी पड़ताल में बीबीसी ने तथ्यों से परे और लोगों को गुमराह करने वाला पाया है.

भारत की सरकारी वेबसाइट पीएम इंडिया के अनुसार 20 अगस्त 1944 को मुंबई में जन्मे राजीव गांधी 40 साल की उम्र में देश के प्रधानमंत्री बने थे.

वायरल मैसेज में जिस समय का ज़िक्र (भारत-पाक युद्ध, 1971) किया गया है, उस समय उनकी माँ इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थीं और राजीव गांधी भारत की राजनीति से दूर थे.

सरकारी वेबसाइट के अनुसार विमान उड़ाना राजीव गांधी का सबसे बड़ा शौक था. अपने इस शौक़ को पूरा करने के लिए उन्होंने लंदन (इंग्लैंड) से पढ़ाई पूरी करके लौटते ही ‘दिल्ली फ़्लाइंग क्लब’ की लिखित परीक्षा दी थी और उसके आधार पर ही राजीव गांधी कॉमर्शियल (वाणिज्यिक) लाइसेंस पाने में सफ़ल हुए थे.

वेबसाइट के मुताबिक़, भारत के सातवें प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने साल 1968 में भारत की सरकारी विमान सेवा ‘इंडियन एयरलाइंस’ के लिए बतौर पायलट काम करना शुरू किया था और क़रीब एक दशक तक उन्होंने यह नौकरी की थी.

राजीव गांधी कभी भी भारतीय वायु सेना के नियमित पायलट नहीं रहे. उन्हें फ़ाइटर पायलट बताने वालों का दावा बिल्कुल ग़लत है.

सोनिया गांधी पर क़िताब लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रशीद क़िदवई ने बीबीसी को बताया, “1971 के युद्ध से उनका कोई वास्ता नहीं था. वो तो एयर इंडिया के लिए यात्री विमान उड़ाते थे. उन्हें बोइंग विमान उड़ाने का बहुत शौक था. जब उनका करियर शुरू हुआ था, तब उस तरह के बड़े यात्री विमान भारत में नहीं थे. लेकिन अपने करियर के आख़िरी सालों में उन्होंने बोइंग विमान उड़ाया था.”

बच्चों के साथ देश छोड़ा?

वायरल मैसेज में दावा किया गया है कि ‘भारत-पाक युद्ध के दौरान वो अपनी पत्नी सोनिया गांधी और बच्चों (प्रियंका-राहुल) के साथ देश छोड़कर इटली चले गए थे’. ये दावा भी झूठा है.

जब 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध लड़ा गया, तब राहुल गांधी क़रीब 6 महीने के थे और प्रियंका गांधी का जन्म ही नहीं हुआ था. उनका जन्म 1972 में हुआ.

रशीद क़िदवई राजीव गांधी के देश छोड़ने की बात को अफ़वाह बताते हुए कहते हैं, “पहली बात तो ये है कि युद्ध में राजीव की कोई भूमिका नहीं थी, उनकी माँ देश की कमान संभाल रही थीं. दूसरी अहम बात है कि 1971 के युद्ध में ख़ुद इंदिरा गांधी तो कहीं नहीं गई थीं और उनके पद पर होते हुए ही भारतीय फ़ौज ने पाकिस्तान को बुरी तरह हराया था. तो ऐसे में उनके बेटे या पोते की आलोचना कैसे की जा सकती है.”

राजीव गांधी का अंतिम साक्षात्कार करने वाली वरिष्ठ पत्रकार नीना गोपाल भी ‘राजीव गांधी के देश छोड़ने के दावे’ पर शक़ करती हैं और कहती हैं, “जो भी हों, राजीव गांधी कायर तो बिल्कुल नहीं थे. डर के उन्होंने देश छोड़ा, ये कहना उनका अपमान है. वैसे भी उनकी माँ इदिरा गांधी के सामने पाकिस्तान ने आकर शांति के लिए हाथ जोड़े थे.”

वायरल मैसेज में एक चीज़ ठीक है और वो है राजीव गांधी की तस्वीर जिसमें वो पायलट की ड्रेस पहने हुए हैं. राजीव गांधी की ये तस्वीर ‘दिल्ली फ़्लाइंग क्लब’ में लगी हुई है.